ईवीएम पर उठे सवाल का जवाब है वीवीपैट

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चंद्रमोहन कोठियाल

वीवीपैट से बटन दबाते ही पता चलता है किसे गया वोट

डोईवाला। हाल ही में पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में पहली बार ईवीएम (इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन) पर सवाल उठाए गए हैं।

ईवीएम पर उठे हर सवाल का जवाब वीवीपैट (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन हो सकती है। इस मशीन को वोटिंग के दौरान पोलिंग बूथ पर ईवीएम मशीन के साथ जोड़ने के बाद मतदाता अपना वोट ड़ालते समय वीवीपैट की स्क्रीन पर आसानी से देख सकता है कि बटन दबाने के बाद उसका वोट उसी प्रत्याशी को गया है या नहीं।

पांच राज्यों के चुनाव में इस मशीन का सफल ट्रायल भी किया जा चुका है। उत्तराखंड में 15 फरवरी को संपन्न हुए मतदान में प्रत्येक जिले के एक चुनिंदा मतदान केंद्र पर इसका ट्रायल किया गया था। यदि लोकसभा, विधानसभा और दूसरे चुनावों में ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीन को लगा दिया जाए तो शायद कोई ईवीएम मशीन पर सवाल खड़े नहीं कर सकेंगा।

11 मार्च को विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद तमाम दलों के नेताओं ने ईवीएम पर सवाल उठाने के साथ ही बैलेट पेपर से मतदान करवाने की मांग की थी। इन सभी नेताओं की पाटियों को चुनावों में करारी हार मिली थी। जिसके बाद इन सभी ने ईवीएम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

इन सभी ने अपनी हार के लिए ईवीएम को ही जिम्मेदार ठहराया है। इसलिए वीवीपैट को ईवीएम मशीन के साथ जोड़ने से इस समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है।
ये उठाए थे सवाल

विधानसभा चुनावों में मुंह की खाने के बाद कुछ नेताओं ने कहा था कि ईवीएम मशीन में गड़बड़ी थी। मतदाता तो अपनी पसंद के प्रत्याशी के नाम वाला बटन दबा रहे थे। लेकिन अधिकांश बार वोट एक ही पार्टी को जा रहा था। जिस कारण उनकी हार हुई है। जबकि वोट देने वाले मतदाताओं ने कभी ऐसी कोई मांग नहीं उठाई है।

वीवीपैट में 7 सैकेंड दिखती है पर्ची

ईवीएम के साथ पीवीपैट मशीन जोड़ने के बाद वोटिंग के दौरान जैसे ही मतदाता ईवीएम में अपने पसंद के उम्मीदवार का बटन दबाता है। तो उसे वीवीपैट मशीन में लगी स्क्रीन पर एक पर्ची नीचे बॉक्स में गिरती हुई दिखाई देती है।

इस पर्ची में प्रत्याशी का चुनाव चिन्ह् और बाकि डिटेल रहती है। ये पर्ची केवल सात सैकेंड के लिए ही मतदाता को दिखाई देगी। मतदाता इस पर्ची को अपने साथ नहीं ले जा सकेगा।

लेकिन विवाद की स्थिति में रिटनिंग ऑफिसर की अनुमति से वीवीपैट की पर्चियों और ईवीएम के आंकड़ों का मिलान करके स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। दैनिक उत्तराखंड 7 फरवरी में अंक में सबसे पहले ये जानकारी अपने पाठकों को दे चुका है। उधर वीवीपैट की जानकारी रखने वाले सक्षम अधिकारियों का भी मानना है कि वीवीपैट मशीन के इस्तेमाल के बाद ईवीएम की विश्वसनियता काफी बढ़ जाएगी।

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