टेली-रेडियोलॉजी से इलाज शुरू करने वाला देश का पांचवां राज्य बना उत्तराखंड

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टेली-रेडियोलॉजी से इलाज शुरू करने वाला देश का पांचवां राज्य बना उत्तराखंड
  • सरकार ने रेडियोलॉजिस्टों की कमी के मद्देनजर लिया यह निर्णय (टेली-रेडियोलॉजी)
  • टेली-रेडियोलॉजी इस पद्धति से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को मिलेगा त्वरित इलाज
  • नोएडा की एक कंपनी के साथ राज्य सरकार ने किया है एमओयू
देहरादून: टेली-रेडियोलॉजी उत्तराखण्ड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए सरकार ने चिकित्सा उपचार में आ रही समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य में आधुनिक तकनीकी को विकल्प के तौर पर टेली रेडियोलॉजी पद्धति के जरिए इलाज शुरू करने का निर्णय लिया है। टेली रेडियोलॉजी के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात चिकित्सकों द्वारा उपचारित किए जा रहे रोगियों के बारे में जांच एवं विशेषज्ञ मत प्राप्त किए जा सकेंगे, जो रोगी तथा चिकित्सक दोनों के लिए यह पद्धति लाभदायक साबित होगी। भारत में यह पद्धति लागू कराने वाला उत्तराखण्ड पांचवा राज्य है। इससे पूर्व हरियाणा, आसाम, मेघालय एवं आन्ध्र प्रदेश में यह पद्धति कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 135 रेडियोलाजिस्ट के पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष कुल 33 रेडियोलाजिस्ट ही कार्यरत हैं। रेडियोलाजिस्ट की भर्ती में अत्यधिक कठिनाईयां आती हैं, क्योंकि रेडियोलाजिस्ट की संख्या कम होने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में रेडियोलाजिस्ट को राजकीय क्षेत्र के सापेक्ष अच्छा पैकेज मिलता है। टेली रेडियोलाजी प्रणाली से रेडियोलाजिस्ट की कमी दूर होने के साथ-साथ चिकित्सकीय परामर्श का एक सस्ता विकल्प प्रदान किया जा सकता है।
टेली रेडियोलाजी सिस्टम की कार्य प्रणाली की जानकारी देते हुए अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य ओम प्रकाश ने बताया कि इस प्रणाली के माध्यम से दूरस्थ चिकित्सा इकाई पर भर्ती मरीज का एक्सरे, सीटी तथा एमआरआई एक निर्धारित उच्च गुणवत्ता केन्द्र पर कराया जा सकता है। टेली रेडियोलाजी से प्राप्त रिपोर्ट को विशेषज्ञ रेडियोलाजिस्ट इलैक्ट्रानिक माध्यम से देख सकते हैं और अपनी राय तथा परामर्श दूरस्थ चिकित्सालय पर तैनात चिकित्सक को सरलता से बता सकते हैं।
इस तरह उपचार लेने वाले मरीज को भी बिना रेडियोलाजिस्ट से मिले हुए सम्पूर्ण जांच तथा परीक्षण की सूचना प्राप्त हो जाती है। टेली रेडियोलाजी पद्धति द्वारा मरीज का 30-40 मिनट के अन्तर्गत सम्पूर्ण परीक्षण किया जा सकता है तथा परीक्षण की रिपोर्ट भी संबंधित चिकित्सक तक पहुंचायी जा सकती है, जबकि सामान्य तौर पर एक मरीज के एक्सरे सीटी तथा एमआरआई आदि रेडियोलाजी जांचों पर लगभग एक दिन से भी अधिक का समय लगता है।
काबिले गौर है कि मेडिकल कालेज चिकित्सालय हल्द्वानी में यह सुविधा पूर्व से ही संचालित हो रही है, जो नोएडा के विटाल टेली-रेडियोलाजी संस्थान के माध्यम से संचालित हो रही है। इस फर्म द्वारा ही टेली रडियोलाजी को प्रदेश के अन्य चिकित्सालयों में संचालित किए जाने का निर्णय लिया गया है। ओम प्रकाश ने बताया कि राजकीय दून चिकित्सालय में टेली रेडियोग्राफी सिस्टम से विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार की सुविधा अगले 2-3 दिनों में प्रारम्भ हो जायेगी, जबकि प्रदेश के अन्य 35 राजकीय चिकित्सालयों में यह प्रणाली अगले माह तक शुरू कर दी जाएगी।
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