मंत्री बनते ही गायब हुई हरक की संवेदनशीलता

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_ खनन माफिया के हाथों मारे गये वनकर्मी के घर सांत्वना देने नहीं पहुंचे वन मंत्री

देहरादून। जरा उस वाकये को याद करिये, जब भाजपा नेता हरक सिंह रावत विधानसभा चुनाव के समय कोटद्वार में अचानक दुर्घटना में मारे गये एक व्यक्ति के घर उसके परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे थे। वह वहां फूट-फूट कर इस कदर रोये कि उनका रोना मीडिया की सुर्खियां बन गया। उस समय हरक सिंह ने कहा था कि “सुरेन्द्र सिंह नेगी ने सिर्फ कैबिनेट मंत्री हैं बल्कि कोटद्वार के विधायक भी हैं, लेकिन नेगी का आम लोगों के दुख से कोई वास्ता नही है। जो लोगों के जख्मों पर मरहम नही लगा सकता वो कैसे जनता का प्रतिनिधि बन सकता है”। उस समय हरक सिंह की संवेदनशीलता की लोग दाद देने लगे। लेकिन अब जबकि परिस्थितियां बदल चुकी हैं। सुरेन्द्र की जगह हरक सिंह रावत कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं तो हरक की संवेदनशीलता गायब हो गई है। वन मंत्री होने के बावजूद हरक सिंह रामनगर में खनन माफिया के गुर्गे द्वारा ट्रक से कुचल कर मार दिये गये वन कर्मी के घर पर नहीं पहुंचे जबकि यह मामला इन दिनों चर्चाओं में है।

बात-बात पर भावुक हो जाना कैबिनेट मंत्री हरक सिंह की आदत रही है। समाचार चैनलों पर उनको कई बार आंसू बहाते देखा गया है, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि हरक आंसू सिर्फ इसलिये बहाते हैं ताकि इसका उन्हें राजनैतिक लाभ मिल सके। यदि इस बात में सच्चाई नहीं होती तो हरक सिंह अभी तक रामनगर में खनन माफिया के शिकार हुये वन कर्मी के घर सांत्वना देने पहुंच चुके होते। बताते चलें कि बीते शुक्रवार को कोसी नदी में खनन कर रहे खनन माफिया ने वन कर्मियों द्वारा रोके जाने पर न सिर्फ दो वनकर्मियों को बंधक बनाया बल्कि एक अन्य वन कर्मी (बीट वॅाचर) पहलवान सिंह निवासी ग्राम केड़ा बनाखेड़ा बाजपुर को ट्रक से कुचल दिया। मामला मीडिया में उछला तो मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने न सिर्फ डीएफओ समेत वन विभाग के कर्मचारियों पर कार्रवाई की बल्कि सम्बंधित पुलिस चौकी को भी सस्पेंड कर दिया। हत्या का मुख्य आरोपी भी गिरफ्तार हो चुका है। मृतक वनकर्मी के घर शोक का माहौल है। तमाम राजनेता, बुद्धिजीवी लोग व अधिकारी मृतक के परिजनों को सांत्वना देने उसके घर पहुंचे। लेकिन सूबे के वन मंत्री हरक सिंह रावत अभी तक उसे घर दुख जताने नहीं पहुंचे हैं। सवाल यह है कि क्या बात-बात पर भावुक होने वाले हरक सिंह की संवेदना आम लोगों के मर चुकी है। उन्हें सिर्फ अपने राजनैतिक लाभ के लिये ही आंसू बहाना आता है।

 

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