डॉक्टर और फार्मेसिस्ट समेत 5 कर्मियों की बर्खास्तगी की संस्तुति

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  • टिहरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबगांव का है मामला
  • प्रसव के लिए अस्पताल लाई गई महिला, बंद मिला अस्पताल
  • अस्पताल के बाहर जन्मे बच्चे की आधे घंटे बाद हो गई थी मौत

नई टिहरी: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबगांव के मैदान में एक प्रसूता द्वारा बच्चे को जन्म देने और इसके आधे घंटे बाद बच्चे की मौत होने के मामले में जिला प्रशासन ने जांच करके कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। डीएम टिहरी ने लंबगांव स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत डाक्टर, फार्मेसिस्ट सहित पांच स्वास्थ्य कर्मियों को इसके लिए जिम्मेदार बताते हुए बर्खास्त करने की संस्तुति स्वास्थ्य महानिदेशक को भेजी है।

बता दें कि मामला टिहरी जिले के प्रतापनगर विकास खंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबगांव का है, जहां शनिवार 15 अप्रैल को पड़िया गांव की 29 वर्षीय उमा देवी पत्नी राजेश्वर रावत को प्रसव पीड़ा के दौरान परिजन उसे दोपहर बाद ढाई बजे 15 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबगांव ले गए। लेकिन अस्पताल में ताला लटका मिला तो परिजनों ने उमा को परिसर में ही लिटा दिया। उमा का भाई विक्रम डॉक्टर की तलाश में आस-पास के लोगों से पूछने चला गया। अस्पताल में डॉक्टर समेत छह लोगों का स्टाफ है। इनमें नर्स, एएनएम और वार्ड ब्वाय के अलावा दो अन्य कर्मचारी हैं।

इस बीच उमा का दर्द बढ़ गया। कुछ ही देर में साथ आई महिलाओं की मदद से अस्पताल परिसर में ही उसने बेटा जन्म दिया। परिजनों के अनुसार करीब आधे घंटे बाद नवजात शिशु की मौत हो गई।

इस घटना के बाद स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया। मामले तूल पकड़ने पर सीएमओ डा़ अुर्जन सिंह सेंगे ने जांच के आदेश थे। डिप्टी सीएमओ ने जांच में अस्पताल में डाक्टर सहित पांच कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने का उल्लेख किया था। इसके बाद सीएमओ ने एएनएम और नर्स की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए थे। वहीं डाक्टर, फार्मेसिस्ट सहित पांच कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए डीएम टिहरी इंदुधर बौड़ाई और स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र भेजा था। उधर, इस मामले में स्वास्थ्य महानिदेशक डा़ डीएस रावत का कहना है कि जांच रिपोर्ट का परीक्षण कराया जाएगा। कर्मचािरयों की सेवा शर्तों के अनुसार सख्यत कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी मिला यहां ताला

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लंबगांव में पिछले साल भी ऐसा ही मामला सामने आ चुका है। 24 जनवरी 2015 को भी प्रसव पीड़ि‍त महिला को अस्पताल लाया गया तो यहां ताला मिला। एंबुलेंस की तलाश में परिजनों को वक्त लगा तो महिला ने सड़क पर बच्चे को जन्म दिया। हालांकि, शिशु ठीक ठाक रहा। लेकिन इस बार उमा देवी ने बच्चे को जना पर बच्चे की जान नहीं बच पाई। काश समय पर बच्चे को उपचार मिल जाता तो एक जिंदगी बच सकती थी।

 

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