बाबा केदार के दुग्धाभिषेक के लिए मंदिर समिति पालेगी गाय

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रुद्रप्रयाग। अब केदार बाबा का अभिषेक केदारनाथ में पली गाय के दूध-घी से होगा। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने केदारपुरी में दो गायों को पालने का फैसला किया है। यह एक पायलेट प्रोजेक्ट होगा। यदि सफल रहा तो समिति के सभी 52 मंदिरों में गाय की व्यवस्था की जाएगी। मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह ने बताया िकइस सेवा को आजीविका व रोजगार से भी जोड़ा जाएगा।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि केदारनाथ में समिति दो स्थानीय गाय रखेगी। हालांकि इस संबंध में अभी पशुचिकित्सक की राय ली जा रही है कि केदारपुरी में किस नस्ल की गाय रखी जाएं।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में दो गाय रखने की योजना है। इन गायों के दूध व घी से ही बाबा केदार की पूजा-अर्चना की जाएगी। अभी तक मंदिर समिति घी बाजार से खरीदती थी। उन्होंने बताया कि इन गायों के बछड़ों को समिति द्वारा संचालित अन्य मंदिरों में भी दिया जाएगा। इस सेवा को बदरी-केदार गो सेवा का नाम दिया गया है।

समिति के सीईओ बीडी सिंह ने कहा कि चारधाम यात्रा की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि केदारनाथ में अब भीम शिला की नियमित पूजा होगी। गौरतलब है कि भीम शिला मंदिर के पीछे की वह शिला है जिसने 2013 की आपदा के समय मंदिर की रक्षा की थी।

उन्होंने बताया कि पुजारी नियमित रूप से इस शिला की पूजा भी करेंगे। इसके अलावा प्रसाद के रूप में केदारपुरी की मिट्टी और मंदिर का फोटो श्रद्धालुओं को 21 रुपये में दिया जाएगा।

श्रद्धालुओं को केदारपुरी में चाय दी जाएगी और एक हजार कंबलों की व्यवस्था की गई है। इन कंबंलों को टोकन के आधार पर वितरित किया जाएगा। कोई भी श्रद्धालुओ 100 रुपये जमानत राशि जमा कर कंबंल ले सकता है, कंबल वापसी पर जमानत राशि लौटा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए गौरीकुंड, सोनप्रयाग व केदारनाथ में भंडारे की व्यवस्था की गई है।

बदरीनाथ में महाराष्ट्र का ओम

इस बार बदरीनाथ मंदिर का मुख्य चिन्ह महाराष्ट्र का ओम होगा। इस आशय की जानकारी देते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीडी सिंह ने बताया कि हर साल बदरीनाथ में अलग-अलग राज्यों के प्रतीक चिन्ह को मंदिर के ऊपर लगाया जाता है। इस बार महाराष्ट्र का ओम प्रतीक चिन्ह होगा।

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