शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान, 60 हजार शिक्षकों की होगी सीबीआई जांच

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  • विभाग को लंबे समय से मिल रही फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी हड़पने का आरोप
  • शिक्षा मंत्री के फैसले से शिक्षकों में मची खलबली, कार्रवाई को फाइल सीएम को भेजी
  • फर्जीवाड़े में शामिल विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी भी आएंगे जांच के दायरे में

देहरादून: अपने साहसिक फैसलों के चलते सुर्खियों में उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे का दांव सही चला तो आने वाले समय में शिक्षा महकमें में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। शिक्षा विभाग में लगातार फर्जी प्रमाण पत्रों के मार्फत नौकरी पाने वालों की शिकायत मिल रही थी, जिसे देखते हुए शिक्षा विभाग ने करीब 60 हजार शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री के इस फैसले से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने आते ही एक के बाद एक कई अहम फैसले लिए हैं। उनके निर्णयों से शिक्षा विभाग की तस्वीर बदलेगी यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन उनके फैसलों से आलसी और ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों में खलबली मची हुई है। उनके हर दिन एक नए फरमान ने बेईमान शिक्षकों की मुसीबतें बढ़ा दी है। नित नए फरमानों के चलते आजकल शिक्षा मंत्री सुर्खियों में हैं। शिक्षा निदेशालय और सचिवालय में आजकल सिफारिशी शिक्षक कहीं भी फटकते नहीं दिख रही है। यह शिक्षा मंत्री की सख्ती का ही असर है।

एक ताजे फैसले में शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के सभी शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया है। गुरूवार को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने अपर मुख्य सचिव शिक्षा डा.रणवीर सिंह के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। बताया जा रहा कि 60 हजार से ज्यादा शिक्षक इस जांच के दायरे में आ रहे हैं। मंत्री ने बताया कि सीबीआई जांच की फाइल सीएम को भेजी गई है। खास बात यह है कि जांच के दायरे में शिक्षकों के साथ जिलों के अधिकारी भी आएंगे।

गौरतलब है कि पिछले दो वर्ष में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी कर रहे 78 शिक्षकों के मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें 34 शिक्षकों को पिछले वर्ष बर्खास्त कर दिया गया था। बाकी की जांच चल रही है।

फर्जी नियुक्तियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए नौकरी पानी वाले शिक्षकों के लिए सीधे तौर पर विभागी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि यदि नियुक्ति के वक्त लापरवाही न बरती जाती तो फर्जी शिक्षक भर्ती ही न होत पाते। उन्होंने कहा कि भर्ती के दौरान अफसरों ने सांठ-गांठ करके बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा करने की बात भी सामने आ रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसे अफसरों को भी चिन्हित किया जाएगा।

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