धोखाधड़ी के मामले में उपाध्याय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

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धोखाधड़ी के मामले में उपाध्याय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी

देहरादून : धोखाधड़ी के मामले में उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के भाई सचिन उपाध्याय के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ है। दिल्ली के साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने फर्जी कागजात के आधार पर जमीन बेचने के मामले में सचिन व उनकी पत्नी नाजिया के खिलाफ दफा 420 और 34 के तहत गैर जमानती और जमानती वारंट जारी किया है।

पिछले कुछ दिनों पहले एक खबर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई देहरादून के बंटी और बबली। जिसमें विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर बताया गया था कि कैसे कांग्रेसी नेता किशोर उपाध्याय के छोटे भाई सचिन उपाध्याय और उनकी पत्नी नाजिया युसूफ युसुद्धीन फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों को जमीन बेचते हैं। इन्हीं में से एक मामला दिल्ली के साकेत थाने में लंबित था। पुलिस के ढुलमुल रवैया के कारण कोर्ट को इस मामले में दखल देना पड़ा, जिसके बाद थाने को 25 मार्च 2019 को सचिन व नाजिया के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 34 के तहत साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करनी पड़ी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिन उपाध्याय के खिलाफ गैरजमानती वारंट और नाजिया के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।

जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल एस.एंड एन. लाइफस्टाइल इंन्फ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड़ कंपनी द्वारा देहरादून के विकासनगर क्षेत्र के परवल इलाके में द ग्रीन दून वैली के नाम से एक टाउनशिप की योजना लाई गई। द ग्रीन दून वैली नामक इस टावनशिप में एक अवैध कच्ची कॉलोनी को प्राधिकरण द्वारा पारित बताते हुए भोले – भाले लोगों को लुटा गया। पहाड़ के भोले – भाले लोगों को यहां सब्जबाग के सपने दिखाकर प्लॉट बेचे गए। प्लॉट खरीदने के बाद जब इन लोगों ने अपने प्लॉट की जानकारी जाननी चाही तो सचिन उपाध्याय और नाजिया लोगों को ड़रा धमका कर भगा देते। इन्हीं लोगों में से एक दिल्ली निवासी प्रेम वल्लभ शर्मा हैं। इन्होंने यहां चार प्लॉट खरीदे। प्रेम वल्लभ शर्मा को भी जब सचिन और नाजिया ने धमकाया तो इन्होंने विकासनगर तहसील में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी कि सचिन उपाध्याय और नाजिया की कंपनी एस.एन. लाइफस्टाइल इंन्फ्रावेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड़ के पास कितनी जमीन है। आरटीआई में मिली जानकारी के मुताबिक इन दोनों मियां – बीवी के नाम एक इंच की जमीन भी नहीं थी। आरटीआई में ही पता चला कि जिस जमीन को दिखाकर पैसे ऐंठे गए थे, वह जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर थी।

गौरतलब है कि यह गौरखधंधा किशोर उपाध्याय के दिल्ली वाले घर से चलता है। सचिन उपाध्याय का ऑफिस यहीं है। इसके साथ ही सचिन देहरादून के राजपुर रोड़ से एक अवैध क्लब का संचालन भी कर रहा है।

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प्रेम वल्लभ शर्मा ने जब नाजिया और सचिन के सामने आरटीआई के कागज रखकर पूछा कि किस आधार पर इन्होंने जमीन बेची तो दोनों मियां – बीवी ने शर्मा के साथ बदमीजी कर उन्हें ऑफिस से निकाल दिया। आहत कर शर्मा ने दिल्ली के साकेत थाने में शिकायत दर्ज की लेकिन सचिन की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस ने इस शिकायत में कोई रुचि नहीं दिखाई, उल्टा उन्हें धमकाने लगे परन्तु शर्मा ने हार नहीं मानी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। यहां धारा 156(3) में मुकदमा दर्ज किया, तत्पश्चात कोर्ट के हस्ताक्षेप के बाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

पहले पुलिस का रवैया ढुलमुल रहा लेकिन कोर्ट के बार – बार दवाब डालने पर आखिरकार चार्जशीट दाखिल की गई। जिसमें यह माना गया कि सचिन व नाजिया ने लोगों के साथ धोखाधड़ी की है और 420 का मुकदमा कायम रहा।

प्रेम वल्लभ शर्मा से बातचीत में पता चला कि वह अकेले ऐसे शख्स नहीं है बल्कि ऐसे कई लोग हैं जिन्हें सचिन और नाजिया ने झांसा देकर लुटा है। प्रेम वल्लभ शर्मा से हौंसला पाकर उन में से कई लोगों ने अब अपनी शिकायत विभिन्न थानों में दर्ज कराई है, जिनकी विवेचना अभी जारी है।

प्रेम वल्लभ शर्मा ने बताया कि उनके साथ धोखाधड़ी तो हुई ही है लेकिन इस लड़ाई को लड़ने के लिए उन्होंने सिर्फ अपनी जमापूंजी नहीं खर्च की बल्कि कई मानसिक पीड़ाओं से भी गुजरना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पांच साल की लड़ाई के बाद अब जाकर चार्जशीट दाखिल हुई है और आगे भी यह लड़ाई जारी रहेगी।

अब देखना ये होगा कि आखिर कब तक शासन – प्रशासन सचिन और नाजिया के अवैध कारनामों पर आंखें मूंदे रहेगा। आखिर कब तक सचिन उपाध्याय को किशोर उपाध्याय के अनुज होने का आशीर्वाद मिलेगा।

 

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