आज के दिन हुआ था पर्यावरण रक्षक ‘जिम कार्बेट’ का जन्म

0
20
आज के दिन हुआ था पर्यावरण रक्षक 'जिम कार्बेट' का जन्म

देहरादूनःजिम कार्बेट’ का पूरा नाम ‘जेम्स एडवर्ड कार्बेट‘ था। इनका जन्म ’25 जुलाई 1875’ ई. में हुआ था। जिम कार्बेट बचपन से ही बहुत मेहनती और साहसी व्यक्ति थे। उन्होंने कई काम किये। इन्होंने ड्राइवरी, स्टेशन मास्टरी तथा सेना में भी काम किया और अनेत में ट्रान्सपोर्ट अधिकारी तक बने परन्तु उन्हें वन्य पशुओं का प्रेम अपनी ओर आकर्षित करता रहा। जब भी उन्हें समय मिलता, वे कुमाऊँ के वनों में घूमने निकल जाते थे। वन्य पशुओं को बहुत प्यार करते। जो वन्य जन्तु मनुष्य का दुश्मन हो जाता – उसे वे मार देते थे।

जेम्स एडवर्ड जिम कार्बेट जिन्होंने दर्जनों आदमखोर बाघों और तेंदुओं का शिकार किया था। जिम कार्बेट के प्रयासों से ही देश को पहला नेशनल पार्क मिला था जो वर्तमान में नैनीताल में स्थित है। उन्हें पर्यावरण रक्षक के रूप में जाना जाता है। उन्हें ब्रिटिश इंडियन आर्मी में कर्नल की रैंक प्राप्त थी। उनका निधन 19 अप्रैल 1955 को केन्या में हुआ था।

पहाड़ और जंगल में रहने की वजह से वह जानवरों को उनकी आवाज से पहचान लेते थे। उन्हें पर्यावरण और पशु-पक्षियों से काफी लगाव भी था। जिम पहाड़ों की रानी मसूरी को भी बहुत पसंद करते थे। शिकार के साथ जिम कार्बेट को फोटोग्राफी का बहुत शौक था। उनकी कई यादें यहां पर आज भी कैद हैं।

यहीं पर उन्होंने शेरनी के बच्चे को पाला था जिसका नाम डायना रखा था। उन्होंने बताया कि जिम कार्बेट शिकार पर जाते समय अपने साथ प्रेशर कुकर, लालटेन और चाकू ले जाते थे, ये सभी आज भी मौजूद हैं। कुकर 1917 का बना हुआ है जिसको इस वर्ष 100 साल पूरे हो गए हैं।जिम कार्बेट से

जुड़ी कुछ बातें-

 

  • इंडो चाइनीज टाइगर को ‘कार्बेट टाइगर’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • रिटायर होने के बाद जिम कार्बेट ने मैन इटर्स आॅफ कुमाऊं नाम की पुस्तक भी लिखी थी।

  • 1928 में केसर-ए-हिंद की उपाधि से भी उन्हें नवाजा गया था।

  • जिम कार्बेट ने शेरों को संरक्षित करने का सुझाव दिया था। जिसके बाद नेशनल पार्क की स्थापना की गयी।

  • 1957 में इस नेशनल पार्क का नाम जिम कार्बेट नेशनल पार्क कर दिया गया।

  • बतौर रेलवे कर्मचारी उन्होंने नौकरी की शुरुआत की थी।

  • नैनीताल में ही जिम ने शुरुआती शिक्षा फिलैंडर स्मिथ कालेज से की और 19 वर्ष की आयु में रेलवे में नौकरी करनी शुरू कर दी।

  • आदमखोर बाघों और तेंदुओं में कार्बेट का खौफ था।

  • जिम कार्बेट को तत्कालीन अंग्रेजी सरकार उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में आदमखोर बाघों को मारने के लिए बुलाती थी।

  • गढ़वाल और कुमाऊं में उस वक्त आदमखोर शेरों का आतंक मचा हुआ था जिसे खत्म करने का श्रेय जिम कार्बेट को जाता है।

  • जिस पहले शेर को जिम कार्बेट ने मारा था उसने 1200 लोगों को मारा था।

  • 1910 में जिस पहले तेंदुए को जिम ने मारा था उसने 400 लोगों को मौत के घाट उतारा था। जबकि दूसरे तेंदुए ने 126 लोगों को मौत के घाट उतारा था, उसे जिम ने 1926 में रुद्रप्रयाग में मारा था।

  • शेरों का शिकार करते-करते जिम को इनसे प्यार हो गया था।

  • कॉर्बेट ने कभी भी किसी ऐसे शेर को नहीं मारा जिसने किसी को नहीं मारा हो।

  • शेरों से प्यार के चलते ही उन्होंने इनके लिए नेशनल पार्क बनाने का सुझाव दिया था।

  • जिम कार्बेट अपनी बहन मैगी कॉर्बेट के साथ गर्नी हाउस में रहते थे।

  • उन्होंने 1947 में केन्या जाते वक्त गर्नी हाउस को कलावती वर्मा को बेच दिया था, जिसे बाद में कार्बेट म्यूजिम के रूप में स्थापित कर दिया गया।

 

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here