पहाड़ों के अलावा ये भी है मसूरी के रमणीक स्थल

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पहाड़ों के अलावा ये भी है मसूरी के रमणीक स्थल

पहाड़ों की रानी के नाम से मशहूर मसूरी प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है। दून घाटी की मनोरम वादियों में स्थित मसूरी की प्राकृतिक सुंदरता को शब्दों में बयां कराना मुश्किल है। घोड़े की नाल के आकार पर बसा मसूरी छुट्यिां बिताने के लिए मुफीद पर्यटक स्थल है। दूर-दूर तक फैले प्रकृति के नजारे सामने बर्फ से ढकी पहाड़ियां, छोटे-छोटे पर्वतों से गिरते जल प्रपात मसूरी की सुंदर छटा को और बढ़ा देते हैं। यहां के रमणीक वातावरण में सैलानियों का मन शीतलता में रम जाता है। मसूरी की सुंदरता को निहारने की लालसा देयाी – विदेशी हर पर्यटक के मन में होती है। शहर की तनाव भरी जिदंगी में मसूरी की सुंदरता मेडिसन का काम करती है। पहाड़ों की रानी मसूरी से रूबरू कराती दैनिक उत्तराखंड की एक रिपोर्ट

मनोरम प्राकृतिक छटाओं के बीच बसा मसूरी के नजारे शैलानियों को बरबस ही अपनी ओर खींच लाते हैं। मसूरी सौंदर्य, शिक्षा, पर्यटन व व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ख्यातिलब्ध है। हिमालय और दून घाटी के बीच बसा मसूरी का नजारा बर्फ से ढ़के होने के कारण बहुत ही मनमोहक लगता है। मसूरी गंगोत्री का प्रवेश द्वार भी है। यहां पाई जाने वाली वनस्पति और जीव-जंतु इसके आकर्षण को और भी बढ़ा देते हैं।

इतिहास के पन्नों में पहाड़ों की रानी

आधुनिक मसूरी के विकास की नींव अंग्रेज कैंप्टन यंग ने रखी। मसूरी की खोज कैप्टन यंग ने 1827 में की थी। कहा जाता है कि ब्रिटिश आर्मी के कैप्टन यंग ने मसूरी की सुन्दरता से प्रभावित होकर यहीं बसने का फैसला किया।

मसूरी का इतिहास सन् 1825 में साहसिक ब्रिटिश मिलिट्री अधिकारी कैप्टन यंग और दून निवासी व राजस्व अधीक्षक शोर, की खोज से होता है। 1827 में लंढ़ौर में एक सैनिटोरियम बनवाया गया, जो आज कैन्टोनमैन्ट के नाम से जाना जाता है। सन 1920-1940 के दौरान मोती लाल नेहरू, इंदिरा गांधी सहित नेहरू परिवार मसूरी प्रवास पर आए। चीन अधिकृत तिब्बत से निर्वासित होने पर सन् 1959 में दलाई लामा यहां आये और तिब्बत निर्वासित सरकार बनाई। बाद में यह सरकार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में स्थानांतरित हो गयी। सन् 1960 में यहां प्रथम तिब्बती स्कूल खुला। अभी लगभग 5000 तिब्बती मसूरी में बसे हुए हैं।

‘मसूरी’ साल दर साल

मसूरी अपने आप में करीब 160 साल पुराना इतिहास समेटे हुए है। -सन् 1828 में लंढौर बाजार की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हुई।

-1832 में महासर्वेक्षक कार्यालय की स्थापना।
पहला स्कूल- मसूरी में पहला स्कूल 1834 में मैकिमोन ने स्थापपित किया।

-1836 में बंगाल इंजीनियर्स के रेनी टेलर ने मसूरी में पहले क्राइस्ट चर्च की स्थापना की। इसी साल मसूरी में पहला बैंक उत्तर- पश्चिम खुला। बाद में 1891 में एलायंस बैंक की स्थापना हुई।

-1841 में हिमालयन क्लब की स्थापना हुई।

मंसूर के पौधों से हुआ मसूरी

अंग्रेजों के आगमन से पहले मसूरी चरवाहों का मुख्य स्थान हुआ करता था। यहां मंसूर पौधों की झाड़ियों में चरवाहों के पशु चरा करते थे। मंसूर झाड़ी के नाम से ही इस जगह को मसूरी कहा जाने लगा। बाद में यह रमणीक स्थान पहाड़ों की रानी मसूरी के नाम से •ाी जाना जाने लगा।

कैमल बैक सेमिट्री

कैमल बैक सेमिट्री कब्रिस्तान में सालों पुराना इतिहास दफन है। यहां मौजूद कब्र मसूरी के स्थापना के वक्त की भी हैं। यहां आस्ट्रेलियाई मूल के उपन्यासकार जॉन लैग व पहाड़ी विल्सन नाम से मशहूर फ्रैडिक विल्सन की कब्रगाह मौजूद है। क्रिमियन युद्ध में भाग लेने वाले अल्फ्रेड हिडमार्क को भी यहीं दफनाया गया।

पर्यटन स्थल

पर्वतों की रानी मसूरी शहर मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है। मसूरी में एक ओर जहां विशाल हिमालय की चमचमाती बर्फीली श्रृंखलाओं का सुंदर नजारा दिखता है, वहीं दूसरी ओर दून घाटी में बिखरी प्रकृति की अद्भुत सुंदरता पर्यटकों को शांति प्रदान करती है। गन हिल, मसूरी झील और केम्पटी फॉल मसूरी के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं।

रमणीक स्थल-

गन हिल

गन हिल मसूरी की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। यहां पर्यटक रोप-वे से जाने का आनंद लेते हैं। रोप-वे की लंबाई करीब 400 मीटर है। गन हिल की सैर में जो रोमांच है, वह अविस्मरणीय है।
गन हिल से हिमालय पर्वत श्रृंखला बंदरपूंछ श्रीकांता, पिठवाड़ा और गंगोत्री पर्वत श्रृंखलाओं के सुंदर नजारे देखे जा सकते हैं। साथ ही मसूरी और दून-घाटी का विहंगम दृश्य सैलानियों को प्रकृति के आगोश में खींच ले जाते हंै।

म्युनिसिपल गार्डन

मसूरी का वर्तमान कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन आजादी से पहले तक बॉटनिकल गार्डन कहलाता था। कंपनी गार्डन के निर्माता विश्वविख्यात वैज्ञानिक ड़ॉ एच. फाकनार लोगी थे। सन् 1842 के आस-पास उन्होंने इस क्षेत्र को सुंदर उद्यान के तौर पर विकसित किया। बाद में इसकी देखभाल कंपनी प्रशासन को दे दी। तब इसे कंपनी गार्डन या म्युनिसिपल गार्डन कहा जाने लगा।

तिब्बती मंदिर

बौद्ध सभ्यता की गाथा कहता यह मंदिर निश्चय ही पर्यटकों का मन मोह लेता है। इस मंदिर के पीछे की तरफ कुछ ड्रम लगे हुए हैं। जिनके बारे में मान्यता है कि इन्हें घुमाने से मनोकामना पूरी होती है।

चाइल्डर्स लज

लाल टिब्बा के निकट यह मसूरी की सबसे ऊंची चोटी है। टूरिस्ट कार्यालय से यह 5 किमी दूर है, यहां तक घोड़े पर या पैदल पहुंचा जा सकता है। यहां से बर्फीले पर्वत श्रृंखलाओं के नजारों को देखना बहुत रोमांचक लगता है।

कैमल बैक रोड

कहा जाता है कि अंग्रेजों के समय में इस रोड़ पर ऊंट की सवारी की जाती थी। कुल 3 किमी लंबा यह रोड रिंक हॉल के समीप कुलरी बाजार से आरंभ होकर लाइब्रेरी बाजार पर जाकर समाप्त होता है। इस सड़क पर सैलानी पैदल चलकर या घुड़सवारी कर मसूरी के मनोरम दृश्यों का आनंद लेते हैं। हिमालय में सूर्यास्त का दृश्य यहां से सुंदर दिखाई पड़ता है। सर्दियों में विंटर लाईन का नजारा खास होता है।

कैम्पटी फाल

ऊंचे-ऊंचे पर्वतों से घिरे इस जलप्रपात के मन•ाावन नजारे लोगों का दिल जीत लेते हैं। यहां की शीतलता में नहाकर पर्यटकों का मन तरोताजा हो जाता है। खासतौर से गर्मी के मौसम में कैम्प्टी जलप्रपात में स्रान करने का अलग अनु•ाव है। 4500 फुट की ऊंचाई पर सुंदर घाटी में स्थित सबसे बड़ा और सबसे खूबसूरत झरना है। यह झरना पांच अलग-अलग धाराओं में बहता है, जो पर्यटकों के लिए खासा आकर्षण का केंद्र बना रहता है। अंग्रेज अपनी चाय की दावत अकसर यहीं पर किया करते थे,त•ाी से इस झरने का नाम कै म्प टी फाल कहा जाने लगा।

कैम्पटी झील

कैम्पटी जलप्रपात के निकट कैम्पटी झील है। यहां उपलब्ध नौकायन और टॉय ट्रेन की सुविधा बच्चों को खासा लु•ााती है। यह स्थल पिकनिक मनाने के इच्छुक लोगों में बहुत ही लोकप्रिय है।

मसूरी झील

मसूरी-देहरादून रोड पर यह नया विकसित किया गया पर्यटक स्थल है, जो मसूरी से लग•ाग 6 किमी दूर है। यह एक आकर्षक स्थान है। यहां पैडल-बोट उपलब्ध रहती हैं। यहां से दून-घाटी और आसपास के गांवों के सुंदर नजारे दिखाई देते हैं।

नाग देवता मंदिर

कार्ट मेकेंजी रोड पर स्थित यह प्राचीन मंदिर मसूरी से लग•ाग 6 किमी दूर है। यहां से मसूरी के साथ-साथ दून-घाटी की मनोहारी छटा के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।

सर जार्ज एवरेस्ट हाउस

प्रथम सर्वेयर जनरल सर जार्ज एवरेस्ट की दि पार्क एस्टेट है, उनका आवास और कार्यालय यहीं था, विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम इन्हीं के नाम पर रखा गया।

ज्वालाजी मंदिर (बेनोग हिल)

यह बेनोग हिल की चोटी पर बना है, जहां माता दुर्गा की पूजा होती है। मंदिर के चारों ओर घना जंगल है, जहां से हिमालय की चोटियों, दून घाटी और यमुना घाटी के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं।

क्लाउड्स एंड

यह बंगला 1838 में एक ब्रिटिश मेजर ने बनवाया। जो मसूरी में बने पहले चार में से एक है। अब इस बंगले को होटल में बदला जा चुका है, क्लाउड्स एंड कहे जाने वाला यह होटल मसूरी हिल के एकदम पश्चिम में, लाइब्रेरी से 8 किमी दूर स्थित है। यह रिजार्ट घने जंगलों से घिरा है, जहां पेड़-पौधों की विविध किस्में मौजूद हैं। विदेशी पर्यटकों और हनीमून पर आने वाले दंपत्तियों के लिए यह सबसे उपयुक्त रिजार्ट है।

ट्रेकिंग रूट

मसूरी-नागटिब्बा

नागटिब्बा से हिमालय की चोटियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। यहां से बरास्ता पंथवाड़ी, नैनबाग और कैम्पटी की कुल 62 किमी की दूरी ट्रैकिंग से तय की जा सकती है।

मसूरी-भद्रज

बरास्ता पार्क टोल-क्लाउड्स एंड, धुधली मसूरी से लगभग 15 किमी दूर यह ट्रेकिंग के लिए एक आदर्श स्थान है। मसूरी शहर के एकदम पश्चिमी क्षेत्र में स्थित से दून घाटी, चकराता श्रृंखला और गढ़वाल हिमालय के जौनसर बालर क्षेत्र के दिलकश नजारे दिखाई देते हैं। बालभद्र को समर्पित मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। प्रति वर्ष अगस्त माह के तीसरे सप्ताह (श्रावण संक्रांति) में यहां एक वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है।

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