स्वर्ग पर जन्नत का दीदार करने के लिए हिटो ‘फूलों की घाटी’

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धरती पर जन्नत का दीदार करने के लिए हिटो फूलों की घाटी

फूल किसे पसंद नही होते हैं। जब किसी बीमार से मिलने जाते हैं तो फूल का गुलदास्तां ले जाते हैं। जब किसी के घर जाते हैं या फिर नेता लोग आते हैं तो उनके स्वागत के लिए फूल के बुके दिए जाते हैं। यहां तक की एक प्रेमी – प्रेमिका भी अपने प्यार का इजहार फूलों से ही करते हैं तो जरा कल्पना कीजिए कि आप एक पहाड़ की चोटी पर खड़े हैं और जहां तक आपकी नजर जा रही है, वहां सिर्फ रंग – बिरंगे फूल खिले हैं, ऐसा नजारा देखकर आपका दिल भी खुश हो जाएगा ना तो चलिए अपनी कल्पना से बाहर आइए, हम आपको बता रहे हैं ऐसी जगह के बारे में, जिसका नाम है फूलों की घाटी। जिसका दरवाजा एक जून से पर्यटकों के लिए खुल गया है। यहां आपको खूबसूरत वादियों में रंगे – बिरंगे कई प्रजातियों के फूल एक ही जगह पर मिल जाएंगे।

कहां स्थित है फूलों की घाटी

फूलों की घाटी उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हैं। यह पवित्र स्थल हेमकुंड साहिब जाने वाले मार्ग के बीच में पड़ती है। फूलों की घाटी को उसकी प्राकृतिक खूबसूरती और जैविक विविधता के कारण 2005 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। 87.5 वर्ग किमी में फैली फूलों की घाटी न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। महाभारत काल में भी इसका जिक्र आया है । महाभारत काल के वन पर्व में इस घाटी को नंदन कानन अथवा स्वर्ग में इंद्र का उपवन कहा गया है।

विदेशी पर्वातारोही ने खोज निकाली थी यह घाटी

फूलों की घाटी की खोज वनस्पति शास्त्री फ्रेक सिडनी स्माइथ ने तब की थी, जब वह कामेट पर्वत से वापस लौट रहे थे तो फूलों से खिली इस सुरम्य घाटी को देख मंत्रमुग्ध हो गए। 1937 में फ्रेक एडिनेबरा बाटनिकल गार्डन की ओर से फिर इस घाटी में आए और तीन माह तक यहां रहे। गढ़वाल के ब्रिटिशकालीन कमिश्नर एटकिंसन ने अपनी किताब हिमालयन गजेटियर में 1931 में इसको नैसर्गिक फूलों की घाटी बताया।

तीन सौ प्रजाति से अधिक फूल खिलते हैं यहां

फूलों की घाटी में एक ही जगह पर तीन सौ से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। यहां पर उगने वाले फूलों में पोटोटिला, प्राइमिला, एनिमोन, एरिसीमा, एमोनाइटम, ब्लू पॉपी, मार्स मेरी गोल्ड, ब्रह्म कमल, फैन कमल जैसे कई फूल शामिल हैं। घाटी मे फूलों के अलावा दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु, वनस्पति, जड़ी बूटियों भी मिलती है।

कैसे पहुंचे फूलों की घाटी

फूलों की घाटी पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से गोविंदघाट तक पहुंचा जा सकता है। गोविंद घाट से फूलो की घाटी की दूरी पैदल तय करनी पडती है। यही मार्ग गुरूद्वारा श्री हेमकुंट साहिब भी जाता है। आगे जाकर दोनो के मार्ग अलग अलग हो जाते है। गोविंदघाट से 14 किमी. की दूरी पर घांघरिया है। जिसकी ऊंचाई 3050 मीटर है। यहां लक्ष्मण गंगा पुलिया से बायीं तरफ तीन किमी की दूरी पर फूलों की घाटी है।

कब आएं

फूलों की घाटी एक जून से 31 अक्तूबर तक खुली रहती है। मगर यहां पर जुलाई के पहले हफ्ते से अक्तूबर के तीसरे हफ्ते तक कई फूल खिले रहते हैं। यहाँ तितलियों का भी संसार है। इस घाटी में कस्तूरी मृग, मोनाल, हिमालय का काला भालू, गुलदार, हिमतेंदुआ भी दिखता है।

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