600 साल बाद बदला गया बद्रनाथ के गर्भग्रह का छत्र, इस परिवार को मिला छत्र चढ़ाने का सौभाग्य

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600 साल बाद बुधवार को भगवान बद्रीनाथ के विग्रह के ऊपर का छत्र बदला गया। इसका सौभाग्य लुधियाना के ज्ञानसेन सूद परिवार को मिला। इस परिवार ने छत्र अपने दादा विमुक्ति महाराज की स्मृति में चढ़ाया है। अब भगवान बदरीनाथ के श्री विग्रह के ऊपर नया हीरा जड़ित स्वर्ण छत्र होगा। यह छत्र चार किलो सोने का है और इसमें कई रत्नों के साथ हीरे भी जड़े हुए हैं।

बुधवार शाम पांच बजे स्वर्ण छत्र को मंत्रों और वेद ध्वनियों के साथ भगवान को समर्पित किया गया। सूद परिवार के तीन सौ से अधिक लोग इस पूजन और भगवान को समर्पित स्वर्ण छत्र अभिषेक समारोह में शामिल हुए।

बदरीनाथ में भगवान के श्री विग्रह को चढ़ाए जाने वाला स्वर्ण छत्र मंगलवार को ही हेलीकाप्टर से बदरीनाथ पहुंचा। दानी परिवार के लोग यहां के एक होटल में रूके हैं। इसमें कई बुजुर्ग लोग एवं महिलाएं भी शामिल हैं। सात्विक और धार्मिक विचारों वाले इस परिवार ने भगवान को समर्पित इस स्वर्ण छत्र को चढ़ाते समय निराहार रह कर पूजा की। बदरीनाथ सिंह द्वार के आगे स्वर्ण छत्र को देखने के लिए भारी संख्या में लोग भी एकत्र हुए। गर्भगृह में केवल रावल और बडवा महाराज ही जा सकते हैं। सभा मंडप में भक्तों के बैठने के लिए जगह है, इसीलिए सूद परिवार सभा मंडप तक आया।

बता दें कि 600 साल बाद बदरीनाथ भगवान का छत्र बदला गया है। बदरीनाथ धाम से संबंधित साक्ष्यों के अनुसार 600 साल पूर्व ग्वालियर की महारानी ने स्वर्ण छत्र चढ़ाया था। अभी तक यही स्वर्ण छत्र भगवान के श्रीविग्रह के ऊपर रहता था। अब नए छत्र को चढ़ा दिया गया है।

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