पुजारी भी आंखों पर पट्टी बांधकर खोलते हैं इस मंदिर के कपाट, श्रद्धालु 75 फीट दूर से करते हैं दर्शन

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यूं तो देवभूमि उत्तराखंड में मंदिरों के दर्शन करने श्रद्धालु कई किलोमीटर दूर से आते हैं लेकिन यहां एक मंदिर ऐसा है, जहां के दर्शन मंदिर के अंदर जाकर नहीं बल्कि 75 फीट की दूरी पर खड़े रहकर ही किए जाते हैं। यहां तक की पुजारी भी आंख, नाक और मुंह पर पट्टी बाँधकर इस मंदिर के कपाट खोलते हैं। जी हां, बात हो रही है चमोली जिले के लाटू देवता की। जिनके कपाट 29 अप्रैल यानी आज खुलेंगे।

लाटू देवता के कपाट साल में एक ही दिन खुलते हैं। लोग बड़ी संख्या में दर्शन करने को आते हैं लेकिन मंदिर के बाहर से ही माथा टेक जाते हैं। यहां मंदिर के अंदर प्रवेश करना वर्जित है। यह मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल ब्लॉक में वांण नामक गांव में है। राज्य में यह देवस्थल लाटू मंदिर नाम से विख्यात है। यहां लाटू देवता की पूजा होती है।

मान्यता है कि इस मंदिर के अंदर साक्षात रूप में नागराज अपने अद्भुत मणि के साथ वास करते हैं, जिसे देखना आम लोगों के वश की बात नहीं है। पुजारी भी साक्षात विकराल नागराज को देखकर न डर जाएं, इसलिए वे अपने आंख पर पट्टी बांधते हैं। श्रद्धालु इस मंदिर परिसर से काफी दूर रहकर पूजा कर मन्नतें मांगते हैं।

आराध्य देवी नंदा देवी के धर्म भाई हैं लाटू देवता

मान्यताओं के अनुसार, लाटू देवता हिमालय की आराध्य नंदा देवी के धर्म भाई हैं। दरअसल, 12 वर्षों पर होने वाली उत्तराखंड की सबसे लंबी पैदल यात्रा श्रीनंदा देवी राजजात का 12वां पड़ाव वाण गांव है। यहां लाटू देवता वाण से लेकर हेमकुंड तक अपनी बहन नंदा देवी की अगवानी करते हैं। मंदिर के कपाट साल वैशाख माह की पूर्णिमा को खुलते हैं।

गांव से एक किमी दूर पर वृक्ष के नीचे स्थित है मंदिर

देवाल ब्लॉक के अंतिम गांव वाण से एक किमी दूरी पर समुद्र की सतह से 8500 फीट की ऊंचाई पर स्थित विशाल देवदार वृक्ष के नीचे एक छोटा मंदिर है। मान्यता है कि इस मंदिर में लाटू की शक्ति विद्यमान है। हिमालय की सबसे लंबी नंदा देवी राजजात यात्रा को संपन्न कराने में लाटू देवता की अहम भूमिका होती है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार लाटू कनौज के गौड़ ब्राह्मण थे, जो मां नंदा के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत की यात्रा पर चले थे। वे जब वाण गांव पहुंचे, वहां उन्हें प्यास लग गई। उन्होंने वहां एक घर में महिला से पानी मांगा। महिला रजुसला थी, इसलिए महिला ने ब्राह्मण से कहा कि उस कमरे में तीन घड़े हैं, उनमें से एक घड़े में पानी है पी लीजिए। ब्राह्मण ने पानी की जगह मदिरा पी लिया। ब्राह्मण नशे में जमीन पर गिर गए और उनकी जीभ कट गई। खून जमीन पर गिरते ही मां नंदा ने दर्शन दिए और कहा तुम मेरे धर्म भाई हो। कहा कि मेरी यात्रा का यहां से आगे का होमकुंड तक अगुवा रहेगा। भक्त मेरी पूजा से पहले तुम्हारी पूजा करेंगे।

 

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