उत्तराखंड के इन पांच पहाड़ी ‘शेरों’ ने संभाली है देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

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उत्तराखंड के इन पांच पहाड़ी 'शेरों' ने संभाली है देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी

यूं तो उत्तराखंड के जाबांजों ने सदियों से सेना में अपना लोहा मनवाया है। आज भी उत्तराखंड का शायद ही ऐसा कोई गांव होगा, जहां से कोई बेटा फौज में ना गया हो और अब सिर्फ सरहदों पर ही नहीं बल्कि देश की रक्षा की रणनीति बनाने की जिम्मेदारी भी उत्तराखंड के जाबांजों पर ही है। नरेन्द्र मोदी की सरकार आने के बाद देश के महत्वपूर्ण पदों पर उत्तराखंड के बेटों को तैनात किया गया तो यहां जानिए कौन हैं वो पहाड़ी शेर…

बिपिन रावत, सेना प्रमुख

Posted by Chief of the India Army staff General Bipin Rawat on 31 ಡಿಸೆಂಬರ್ 2016

उत्तराखंड के पौड़ी जनपद के मूल निवासी ले. जनरल बिपिन रावत को देश का नया सेना प्रमुख बनाया गया है। इनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत भी ले. जनरल रहे हैं। बिपिन रावत को अधिक ऊंचाई वाले स्थान पर युद्ध और आतंकवाद विरोधी गतिविधियों का अनुभव प्राप्त है। वे पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर इंफेंट्री बटालियन की कमान भी संभाल चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कश्मीर घाटी में राष्ट्रीय राइफल्स और एक इंफेंट्री डिवीजन की कमान भी संभाली है। बिपिन रावत को एक सितंबर 2016 को सेना का उप प्रमुख बनाया गया था। इससे पहले वे सेना की दक्षिणी कमान के कमांडर थे।

अनिल धस्माना, रॉ चीफ

जयहरीखाल ब्लॉक के तोली गांव निवासी महेशानंद धस्माना के बेटे अनिल धस्माना को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का नया चीफ बनाया गया है। अनिल धस्माना की शिक्षा-दीक्षा मूल गांव तोली के बाद दिल्ली से हुई। 1981 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी धस्माना को इंदौर के ऑपरेशन बांबे बाजार के बाद एक दबंग अधिकारी के रूप में पहचान मिली। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बेहद करीबी और विश्वासपात्र माना जाता है। पिछले काफी समय उन्होंने रॉ के विशेष निदेशक पद पर सेवाएं दीं। उनके ससुराली देहरादून में सुभाष रोड और ओल्ड सर्वे रोड पर रहते हैं।

अपर महानिदेशक कृपा नौटियाल, नौसेना

अपर महानिदेशक के पद पर प्रमोट वाले कृपा नौटियाल,  अपने मेधावी और गौरवशाली सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति के द्वारा 1992 में तटरक्षक पदक एवं 2013 में राष्ट्रपति तटरक्षक मेडल द्वारा सम्मानित किया गया है।

अपर महानिदेशक कृपा नौटियाल ग्राम हाजा, जौनसार, देहरादून के निवासी हैं।  वह अपने पैतृक क्षेत्र से ऐसे दूसरे फ्लैग अधिकारी है जो तीन स्टार रैंक तक पहुंचे हैं। उनके खुशहाल जीवन में उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता नौटियाल और दो बेटे एवं पुत्र वधू  हैं, जो दिल्ली और चेन्नई में बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ काम कर रहे हैं।

 

अजीत डोभाल, एनएसए

20 जनवरी 1945 को घीड़ी बानेलस्यू, पौड़ी गढ़वाल में जन्मे अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राइट हैंड माना जाता है। अजमेर के मिलिट्री स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने आगरा विवि से अर्थशास्त्र में एमए किया। 1968 बैच के केरल कैडर र्के आईपीएस अधिकारी रहे डोभाल 2005 में आईबी चीफ पद से रिटायर हुए। मिजोरम, पंजाब और कश्मीर में उग्रवाद विरोधी अभियानों में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। वह 30 मई 2014 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने। उनके नेतृत्व में ही म्यांमार के खिलाफ सीमा पार जाकर जवाबी हमला और पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की गई।

 

ले. ज. एके भट्ट, डीजीएमओ

मूलत: खतवाड़ गांव, कीर्तिनगर, टिहरी गढ़वाल निवासी ले.ज. एके भट्ट को कुछ दिन पूर्व ही डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) बनाया गया है। उनके पिता सत्यप्रकाश भट्ट ने लंबे समय तक भारतीय सेना में सेवाएं दी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मसूरी के हेंपटनकोर्ट और कांवेंट स्कूल सेंट जॉर्ज कॉलेज से हुई। गोरखा राइफल्स में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्हें ले.ज. रणबीर सिंह के तबादले के बाद डीजीएमओ बनाया गया था। उनका परिवार पिछले करीब पांच दशक से मसूरी में ही निवास करता है। एके भट्ट मसूरी में क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।

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