मुख्य सचिव की कुर्सी से न हो खिलवाड़

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मुख्य सचिव की कुर्सी वैसी ही मानी जाती है जैसे आम तौर पर आईपीएस में डीजीपी, आईएफएस में हॉफ की.हेल्थ में डीजी की कह सकते हैं..वैसे बाकी दो कुर्सियों से इसका दूर-दूर तक वास्ता नहीं..लेकिन वरिष्ठता इन कुर्सियों पर चलती है..जो सबसे सीनियर, वही बॉस.जैसा सेना, थल सेना और वायु सेना में होता है.बड़े स्तर पर..सबसे सीनियर तो सबका बॉस.

जनरल बिपिन रावत की मिसाल सामने न रखें..उनको चीफ बनाना था.सो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काबिलियत का पैमाना अपना लिया. वरिष्ठता पर तरजीह वाला.सेना में आम तौर पर वरिष्ठता का बहुत सम्मान किया जाता है.रावत की ताजपोशी में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अजीत डोवल (डोभाल) की भूमिका को भी अहम माना गया.रावत से सीनियर दो लेफ्टिनेंट जनरल थे. सरकार ने उनकी काबिलियत पर प्रश्न चिह्न लगा दिया.गोया इतने बड़े रैंक तक वे यूँ ही आ गए.

खैर,बात मुख्य सचिव की हो रही.उत्तराखंड में 2005 तक सब ठीक चला.पहले मुख्य सचिव अजय विक्रम सिंह.जबरदस्त रुआब वाले.रक्षा सचिव बन के छह महीने बाद केंद्र चले गए.दूसरे थे-मधुकर गुप्ता.जुबान से मधु टपकता था.काम में माहिर.केंद्र ने उनको गृह सचिव बनाया.सो जाना ही था उनको भी.फिर उनके ही बैच (1971) के डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया.रात-दिन काम करवा लो.सौ किलो वजनी.लगातार चलवा लो.बस कॉफ़ी,पान और समोसा मिलता रहे.और फिर कौन-अजी वही एम रामचंद्रन.उन्होंने जलवा काटा.

पहले तो प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) के तौर पर.फिर जब मुख्य सचिव बने.खून सुखा के रखा नौकरशाहों का उन्होंने.जब तक वह केंद्र में नहीं गए.शहरी विकास सचिव बन के.दिल्ली के कॉमनवेल्थ खेल घोटाले के दौरान वही थे जी.खूब नाम पढ़ा-सुना होगा उनका तब.उनको उनकी सीनियरिटी और मुख्यमंत्री एनडी तिवाड़ी पर जादू का ईनाम तो मिलना ही था.निष्कंटक राज किया भाई ने.उनकी दाढ़ी के पीछे की मुस्कान या गुस्से का अंदाज लगाने में कोई कामयाब नहीं हो पाया.

रामचंद्रन वह शख्स.जिन्होंने अपने बाद मुख्य सचिव बनने के दावेदार की राह में जम कर कांटे बिछाए.सुरजीत किशोर दास.बहुत भले थे.जहीन भी.1973 बैच में अकेले आईएएस.उसके बाद सीधे 75 बैच वाले.इंदु कुमार पाण्डेय.मुझे याद है.रामचंद्रन को दिल्ली जाना था.तीन दिन बाद.केंद्र की सेवा में.मुख्य सचिव कौन होगा.इस पर कयास का दौर मीडिया और नौकरशाही में जम कर चल रहा था.

मैंने सीधे मुख्यमंत्री (एनडी) से पूछ लिया.पंडित जी..अगला मुख्य सचिव कब-किसको बनाओगे?तीन दिन रह गए.पंडित जी बोले.सुरजीत किशोर दास.मैंने तीन दिन पहले फाइल पर दस्तखत कर दिए हैं.उनकी ताजपोशी के.रामचंद्रन फाइल दबा के बैठ गए थे.मैंने अनजान बन के उनसे पूछा था-मुख्यमंत्री से जानकारी लेने के तुरंत बाद.बोले थे-यह मेरिट का पद है.सीनियरिटी का नहीं.

वह जूनियर को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे.दास का पत्ता काट के.मैंने खबर लिख डाली.अमर उजाला में.पहले पेज पर-दास अगले मुख्य सचिव.उनका आदेश फिर भी महीने के अंतिम दिन ही जारी किया रामचंद्रन ने.दास के बाद इंदु कुमार पाण्डेय ने कुर्सी संभाली.वही वरिष्ठ थे.फिर नृप सिंह नपलच्याल.वह भी वरिष्ठता से बने.छह महीने का सेवा विस्तार भी मिला.थैंक्स टू मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक.कुछ नौकरशाहों को गुस्सा आया था.सेवा विस्तार पर.इस परंपरा को वह ठीक नहीं मानते थे.

फिर खेल शुरू हुआ.1977 बैच में.15 साल तक आयुक्त रहे सुभाष कुमार का मुख्य सचिव बनना तय माना जा रहा था.आसमान से ऐसे में आ टपके अजय जोशी.सुभाष के ही बैच के.ग्रेडेशन लिस्ट में ऊपर.जोशी उत्तर प्रदेश में जमे थे.उत्तराखंड आवंटित हुआ था.नहीं जाऊँगा की जिद पकड़ी हुई थी.वहां दाल जल गई.यहाँ बिरयानी खाने आ पहुंचे.उन्होंने जम के सियासत की.नौकरशाहों का गिरोह बना.मैदानी मूल के मीडिया ने साथ दिया उनका.क्या-क्या नहीं हुआ तब.सुभाष के खिलाफ.तिब्बती बताया गया उनको.उनकी तृतीय श्रेणी वाली मार्कशीट सामने लाई गई.बहुत निम्न स्तर पर सियासत चली.

सुभाष फिर भी मुख्य सचिव बने.उनको उत्तराखंड में निरंतर सेवा,मेहनत,व्यवहार और मंत्रियों-राजनेताओं से मधुर रिश्तों का फायदा मिला.इसके बाद जोशी अँधेरे में खो गए.गुमनामी में ही रिटायर हो गए.मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा बने तो सुभाष को हटाया गया.वह चाहते थे कि एक सन्देश दिया जाए.सरकार बदल गई है किस्म की.सुभाष को हटा के यह सन्देश देना पसंद किया.आलोक कुमार जैन को वरिष्ठता के बिना पर मुख्य सचिव बनाया गया.

फिर जैन को एक साल में ही दो साल की सेवा बचने पर हटा दिया गया.बेहतरीन काम कर रहे थे वह.बस रास नहीं आए कुछ शक्तिशाली लोगों को.सुभाष की वापसी इस बार साजिश के तहत हुई.यह कहा जा सकता है.फिर सुभाष रिटायर हुए.राकेश शर्मा का तब जलवा छाया हुआ था.लग रहा था.वही मुख्य सचिव बनेंगे.उनके दुश्मनों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को डरा डाला.इमेज पानी-पानी हो जाएगी जी.वाकई डर गए वह.

दिल्ली से एन रविशंकर की वापसी सिर्फ साजिश की कड़ी का हिस्सा था.जो नौकरशाहों ने रची थी.राकेश को मुख्य सचिव बनने न देने की कितनी तो कोशिश नहीं हुई.बन्दा भी हार न मानने वाला निकला.मुझे वह दिन याद है.जब सारी सोशल मीडिया में शर्मा के खिलाफ मुहिम चली हुई थी.फिर अचानक सब शांत.अखबारों-सोशल मीडिया के वे ही भाई नाम जपने लगे.शर्मा को रविशंकर के हटने के आखिरी दिन तक पता नहीं था.मुख्य सचिव बनेंगे या नहीं.लोग मान बैठे थे कि वही बनेंगे.खुद शर्मा और एकाध जानते थे.कुछ भी हो सकता है.

शाम चार बजे सचिवालय में रविशंकर की विदाई पार्टी थी.शर्मा को माला पहना के उनका खैर मकदम किया जा रहा था.अगले मुख्य सचिव के तौर पर.आदेश पर मुख्यमंत्री के दस्तखत हुए साढ़े चार बजे.मुझे कार्मिक महकमे के एक अफसर ने फ़ोन पर बताया.शर्मा मुख्य सचिव..मुख्यमंत्री के आवास से निकलते ही.फिर शत्रुघ्न सिंह को फटाफट मुख्य सचिव बनाने और शर्मा को सेवा विस्तार न लेने देने की साजिश चली.

एस रामास्वामी ने शत्रुघ्न की जगह ली.उनको भी तमाम काँटों का सामना करना पड़ा.मैं जानता हूँ.कुछ नौकरशाह उनको नहीं चाहते थे.वे आज भी शक्तिशाली हैं.ये सब क्यों लिख रहा हूँ.इसलिए कि अब अचानक राधा रतूड़ी को अगले मुख्य सचिव के तौर पर देखा जाने लगा है.इस कयास के साथ कि उत्पल कुमार सिंह खुश नहीं हैं.उत्तराखंड में मुख्य सहिव बन के.वापिस केंद्र जाना चाहते हैं.

चर्चा शुरू हो चुकी है.हालाँकि, यह आसान नहीं.उनसे सीनियर कई हैं.डॉ. रणवीर सिंह (अपर मुख्य सचिव) और ओम प्रकाश (अपर मुख्य सचिव) को कहाँ ले जाएंगे?राजस्व परिषद के अध्यक्ष रामास्वामी की भी अभी नौकरी बहुत बची है.फिर भी सियासत के खेल का कुछ पता नहीं चल पाता है.इसलिए लिखा.राधा 1988 बैच की हैं.भली हैं.लोग उनको चाहते भी हैं.उत्तराखंड में वरिष्ठता को पहले भी तलवार की धार पर निबटाया जा चुका है.

जब कंचन चौधरी भट्टाचार्य, अरे वही-देश की पहली महिला डीजीपी, रिटायर हुईं तो सुभाष जोशी पुलिस चीफ बना दिए गए.1976 बैच वाले.उनसे एक बैच ऊपर थे.आलोक बिहारी लाल.साइड में कर दिए गए थे.उनकी सीनियरिटी को आग में झोंक दिया गया.जोशी इंटेलिजेंस चीफ रह चुके थे न.रोज मुख्यमंत्री से काना-फूसी का फायदा मिलना ही था..लाल डीजी रिटायर हो गए.यह डीजीपी से छोटी पोस्ट है.आईपीएस में.आईएएस की तरह नहीं.जहाँ मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव,डीजी (एटीआई) या अध्यक्ष राजस्व परिषद के पे स्केल एक ही है.

 

 

 

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