महाशिवरात्रि 2018: 51 साल बाद बना महाशिवरात्रि पर यह शुभ संयोग

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देहरादून :’महाशिवरात्रि’ देवों के देव महादेव भगवान भोलेनाथ की आराधना, उपासना का त्यौहार है। वैसे तो पूरे साल शिवरात्रि का त्यौहार दो बार आता है लेकिन फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अर्थात् अमावस्या से एक दिन पहले वाली रात को महाशिवरात्रि का त्यौहार मनाया जाता है।

माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने, व्रत रखने और रात्रि भर जागरण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं एवं उपासक के हृद्य को पवित्र करते हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन भगवान शिव की सेवा में दान-पुण्य करने व शिव उपासना से उपासक को मोक्ष मिलता है।

महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त

इसबार महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करने के लिए सिर्फ 51 मिनट का शुभ मुहूर्त ही है। इस समय पूजा करने से आपको पूजा का दोगुफा फल मिलेगा।

51 साल बाद बना महाशिवरात्रि पर यह शुभ संयोग

12 फरवरी यानि सोमवार रात 8:07 बजे से त्रयोदशी यानी प्रदोष लग रहा है, महाशिवरात्रि का यह शुभ संयोग 51 साल बाद बना है।भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में विशेष फलदाई मानी जाती है। इस वक्त पूजा करने से पूरी रात पूजा के बराबर फल मिलता है। करीब 51 मिनट की इस पूजा में साधक को वर्षभर की पूजा का लाभ मिलता है। प्रदोष काल की पूजा विशेष कामना की पूर्ति के लिए की जाती है।

महाशिवरात्रि प्रदोष काल की पूजा का समय 

रात्रि 12:09 बजे से 1:01 बजे तक (कुल 51 मिनट का मुहूर्त रहेगा।)

(13 फरवरी की रात को पूजा का मुहूर्त)
रात को पहले पहर में पूजा का मुहूर्त : 6:05 से 9:20
रात को दूसरे पहर में पूजा का मुहूर्त : 9:20 से 12:35
रात को तीसरे पहर में पूजा का मुहूर्त : 12:35 से 3:49
रात को चौथे पहर में पूजा का मुहूर्त : तड़के 3:49 से 5:04

महाशिवरात्रि पूजन विधि 

  • इस दिन भक्त प्रातकाल उठकर बिना कुछ अन्न ग्रहण करके पानी में तुलसी के पत्ते और नीम मिलाकर स्नान करें जिससे शरीर की शुध्दि हो सके|
  • इसके बाद वे भगवान् शिव की मूर्ति या उनके शिवलिंग की पूजा करें |
  • पूजा के लिए सबसे पहले उनकी मूर्ति और शिवलिंग को दूध से स्नान करवाया जाता है|
  • उसके बाद हल्दी और चन्दन का टिका लगाकर फलाहार और धतूरे का फल चढ़ाया जाता है|
  • इसके बाद उनके नाम का जाप करके उनकी पूजा की जाती है और आरती की जाती है|

महाशिवरात्रि पूजन विधि सामग्री

इस महापूजा में सबसे पहले आपको सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, धतूरा, भाँग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, दही,शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, पंच फल पंच मेवा, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, शिव व माँ पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, वस्त्राभूषण रत्न, सोना, चाँदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन और कुशासन की आवश्यकता पड़ेगी|

 

 

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