हरिद्वार में गंगा के 5 किलोमीटर दायरे में खनन पर लगी रोक हटी

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नैनीताल उच्च न्यायालय

नैनीताल हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले में गंगा नदी के पांच किलोमीटर दायरे में खनन पर लगाई रोक हटा ही है। न्यायालय ने इसके साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई नीति के मुताबिक खनन की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार तथा स्टोन क्रशर मालिकों के लिए राहत पहुंचाने वाला है। नैनीताल हाईकोर्ट ने पिछले साल छह हिसंबर को हरिद्वार जिले के रायवाला से लेकर भोगपुर इलाके तक गंगा नदी के किनारे चल रहे सभी स्टोन क्रशरों को बंद करने के साथ ही खनन को पूर्ण रूप से बंद करने का आदेश सुनाया था। हाईकोर्ट ने यह आदेश हरिद्वार निवासी पवन कुमार सैनी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया था।

इस आदेश का पालन न किए जाने के चलते बीती तीन मई को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा था, मगर इसके बाद भी आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसके बाद हरिद्वार स्थित मातृ सदन  ने हाईकोर्ट में अवमामना याचिका दायर की। इस याचिका का संज्ञान लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश मुख्य सचिव से 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की थी। अदालत के कड़े रुख को देखते हुए सरकार ने अगले ही दिन रायवाला से जगजीतपुर तक के सभी स्टोन क्रशर व खनन बंद करने की रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल कर दी थी।

इस बीच, राज्य सरकार व स्टोन क्रशर मालिकों की ओर से हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई। सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर व मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी ने दलील दी कि पिछले साल छह दिसंबर को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मातृसदन के प्रत्यावेदन व तत्कालीन जिलाधिकारी के पत्र को आधार बनाते हुए गंगा के पांच किमी दायरे में खनन बंद करने का जो आदेश पारित किया गया, उससे पहले सरकार का पक्ष सुना ही नहीं गया।  इस दलील को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने खनन पर लगी रोक हटा दी। साथ ही इस मामले में सरकार को तीन हफ्ते के भीतर प्रति शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया।

कोर्ट ने अपने आदेशों में यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश अवैध खनन करने व अवैध तरीके से स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति का आधार नहीं बनाया जा सकता। बहरहाल नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले से सरकार बड़ी राहत महसूस कर रही है।

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