सरकार ने बदले पुनर्नियुक्ति प्रक्रिया के मानक

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उत्तराखंड सचिवालय

उत्तराखंड सरकार ने लोकसेवकों को रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति दिये जाने की प्रक्रिया के मानकों में बदलाव कर दिया है। बदलाव के तहत अब सरकारी सेवाओं में पुनर्नियुक्ति  पाने वाले लोकसेवकों को गाड़ी, आवास तथा अन्य भत्तों की सुविधा नहीं मिलेगी। प्रमुख सचिव, वित्त राधा रतूड़ी ने इस बाबत सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों तथा प्रभारी सचिवों को आदेश जारी कर दिया गया है। इस फैसले के लागू होने के बाद प्रदेश के सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय भार में कुछ हद तक कमी आने की उम्मीद है।

इस फैसले के लागू होने से पहले पुनर्नियुक्ति पाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों को वाहन, आवास तथा अन्य भत्ते दिए जाने की व्यवस्था लागू थी। इस व्यवस्था के तहत प्रदेशभर में पुनर्नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों को ये सभी भत्ते दिए जा रहे हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में हुए बदलाव के बाद अब पुनर्नियुक्ति पाने वाले कार्मिकों को केवल नियत मानदेय ही मिलेगा। साथ ही उन्हें मिलने वाली छुट्टियों में भी कटौती की गई है। एक कैलेंडर वर्ष में अब उन्हें केवल 14 आकस्मिक अवकाश ही मिलेंगे। अभी तक  ऐसे कार्मिकों को राजकीय सेवकों की तर्ज पर मेडिकल अवकाश व एलटीसी का लाभ भी मिल रहा था। नए बदलाव के तहत उनके प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार भी समाप्त कर दिए है।

घटेगा सरकारी खजाने का बोझ –

राज्य बनने के बाद से वर्तमान समय तक प्रदेश में सैकड़ों लोकसेवकों को रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति दी गई। इन्हें दिए जाने वाले भत्तों तथा अन्य सुविधाओं पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इसके चलते सरकारी खजाने पर बोझ पड़ना लाजमी था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया यह फैसला सरकारी खजाने का बोझ हल्का करने में मददगार साबित होगा।

 

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