अच्छी खबर : आपातकालीन 108 सेवा को मिली छह करोड़ की ‘संजीवनी’

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आपातकालीन 108 सेवा की एंबुलेंस : फाइल फोटो

सिस्टम की उपेक्षा से मूर्छित पड़ी प्रदेश की ‘आपातकालीन सेवा 108’ को आखिरकार संजीवनी मिल गई है। शासन ने इस सेवा के संचालन को दुरुस्त करने के लिए छह करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी है। सेवा का संचालन करने वाली कंपनी, ‘जीवीके आएमआरआई’ द्वारा दो महीने के भीतर राज्य सरकार को टीडीएस के शेष बचे नौ करोड़ रुपये लौटाने का भरोसा दिए जाने के बाद शासन ने छह करोड़ रुपये की राशि जारी करने का फैसला लिया। इस राशि के जारी हो जाने के बाद आपातकालीन सेवा की स्थिति सुधरने की उम्मीद जग गई है।

प्रदेश में इस वक्त 108 सेवा की दुर्दशा से हर कोई वाकिफ है। इस सेवा के अधिकांश वाहनों और कर्मचारियों दोनों की हालत बेहद खराब है। कर्मचारियों को पिछले तीन महीनें से वेतन न मिलने के चलते कई स्थानों पर 108 सेवा के पहिए थमने की खबरें आए दिन सुनने को मिल रही हैं। आपातकालीन सेवा 108 के लगभग 700 कर्मचारी गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। इसका सीधा नुकसान 108 सेवा के संचालन में दिखाई दे रहा है। प्रदेश में तमाम जगहों पर लोगों को समय पर 108 सेवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

दरअसल 108 सेवा की इस दुर्दशा के पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि इसका संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआइ के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं। सरकार ने जीवीके कंपनी का भुगतान इसलिए रोका हुआ था क्योंकि, कंपनी ने सरकार को तय समयावधि के भीतर टीडीएस के नौ करोड़ रुपये नहीं दिए। कंपनी ने पहले सरकार को शपथ पत्र दिया था कि वह तीन माह में नौ करोड़ रुपये वापस लौटा देगी। मगर तीन महीने बीतने के बाद भी कंपनी ने रकम वापस नहीं लौटाई, जिसके बाद सरकार ने कंपनी का भुगतान रोक दिया। अब जीवीके ने एक बार फिर दो महीने की मोहलत मांगते हुए लिखित आश्वासन दिया है जिसके बाद सरकार ने यह राशि जारी की है। जीवीके के साथ सरकार का करार अगले साल खत्म होना है।

जीवीके ईएमआरआइ के साथ प्रदेश सरकार ने साल 2008 में 108 सेवा की शुरुआत के वक्त ही करार किया था। शुरुआती दौर में 108 सेवा ने बहुत अच्छा काम किया, मगर धीरे-धीरे व्यवस्थाएं पटरी से उतरने लगी। आज स्तिति यह है कि लोगों का 108 सेवा से भरोसा लगातार खत्म होता जा रहा है। ऐसे वक्त में सरकार का सेवा के उत्थान के लिए छह करोड़ रुपये की राशि जारी करना सुखद संकेत हैं।

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