जवानों की हरकत ने लगाया ‘वर्दी’ पर दाग

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पुलिस गिरफ्त में आरोपी सेना के जवान

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से देहरादून के महत्व से सभी वाकिफ हैं। सेना में अफसर बनने बाले जाबांज हों या सिपाही बन कर सैन्य सफर शुरु करने वाले जवान, सभी का देहरादून से गहरा नाता है। अफसर बन कर सैन्य कैरियर की शुरुआत करने वाले युवा इसी देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होते हैं, तो इसी शहर में लगभग हर साल सैन्य भर्ती कैंप भी आयोजित होते रहते हैं। कुल मिलाकर सेना के साथ देहरादून का रिश्ता बेहद  खास है।

मगर इसी देहरादून में सैना के दो जवानों ने ऐसी हरकत की है जिसने गौरव, वीरता और सम्मान की प्रतीक ‘वर्दी’ को दागदार कर दिया। दो दिन पहले देहरादून पुलिस ने  सेना के दो जवानों को लगभग पांच करोड़ रुपये की स्मैक के साथ धर दबोचा। इन दोनों के साथ एक तीसरे व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए दोनों जवान सेना के दून स्थित मिलिट्री अस्पताल में तैनात हैं। गिरफ्तार जवानों के पास से बरामद स्मैक पश्चिम बंगाल से तस्करी कर लाई गई थी।

इतनी दूर से देहरादून लाई गई यह स्मैक इस बात का प्रमाण है कि नशे के काले कारोबार का नेटवर्क कितना बड़ा और कितना मजबूत है। जवानों से पूछताछ के जरिए इस नेटवर्क के मास्टर माइंड का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। दो दिन पहले प्रेमनगर क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेश राठौड़ ने नंदा की चौकी के पास चैकिंग अभियान के दौरान एक वाहन को पकड़ा। पूछताछ से पता चला कि वाहन में सवार तीन लोगों में से दो, फूल सिंह यादव और राजू शेख सेना के जवान हैं तथा तीसरा व्यक्ति मंजूर हसन, राजू शेख का चचेरा भाई है।

पुलिस ने इन जवानों के वाहन से एक किलोग्राम स्मैक के साथ ही एक लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद किया। इन जवानों से पुलिस, आईबी, सेना इंटेलीजेंस तथा एलआईयू ने संयुक्त रूप से पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि पकड़े गए जवान पश्चिम बंगाल से कारोबार चलाने वाले अपने सरगना से लगातार संपर्क में रहते थे और वहीं उन तक स्मैक पहुंचाता था। महत्वपूर्ण बात यह है कि पश्चिम बंगाल से देहरादून की दूरी 1600 कीलोमीटर से भी ज्यादा है। पश्चिम बंगाल, बिहार तथा उत्तर प्रदेश को पार करते हुए नशीली सामग्री का देहरादून तक पहुंचना अपने आप में यह बताने के लिए पर्याप्त है कि इस काले कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हैं।

पिछले तीन सालों में देहरादून में नशे का कारोबार तिगुनी रफ्तार से बढ़ा है। साल 2015 में पुलिस  ने 70 लाख रूपये मूल्य के अवैध नशीली वस्तुएं पकड़ी तो अगले साल आंकड़ा ढ़ाई करोड़ के पार पहुंच गया।  प्रदेश की अस्थाई राजधानी देहरादून में नशे का अवैध कारोबार किस हद तक चरम पर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय सेना के जवान तक इस काले धंधे में लिप्त पाए जा रहे हैं। देरहादून में नशे का कारोबार करने वालों की धरपकड़ का यह कोई पहला मामला नहीं हैं। आए दिन नशे की तस्करी करने वालों के पकड़े जाने की खबरें समाचार के जरिए सामने आती रहती हैं, जिससे पता चलता है कि देहरादून शहर नशे के दलदल में किस हद तक धंसता जा रहा है।

प्रदेश की अस्थाई राजधानी के लिहाज से ही नहीं बल्कि अन्य तमाम वजहों से भी देश का बेहद महत्वपूर्ण शहर है। भारतीय सैन्य अकादमी, एफआरआई तथा वाडिया इंस्टीस्यूट जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के साथ-साथ यहां के तमाम प्रतिष्ठित स्कूलों में देशभर के वीआईपी लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। इन वीआईपी लोगों में राजनेता, उद्योगपति, नौकरशाह, फिल्म कलाकार आदि शामिल हैं। ऐसे में देहरादून शहर में फलता-फूलता नशे का यह कारोबार कितनों को निशाना बना सकता है, यह आसानी से समझा जा सकता है।

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