दाभोलकर, पानसरे, कुलबर्गी और अब गौरी लंकेश…आखिर कब थमेगा हत्याओं का सिलसिला ?

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पानसरे, दाभोलकर, कुलबर्गी और गौरी लंकेश

प्रख्यात पत्रकार एवं कन्नड़ भाषा की लेखिका गौरी लंकेश की हत्या से देशभर में लोग स्तब्ध हैं। बंगलुरू में मंगलवार की शाम उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक उन पर अज्ञात हमलावरों ने उस वक्त हमला किया जब वे अपने घर लौट रही थीं। मोटरसाइकिल पर आए बदमाशों ने उन पर गोलियां चलाई। बताया जा रहा है कि गौरी लंकेश को काफी दिनों से धमकियां मिल रही थीं।

55 वर्षीय गौरी लंकेश दक्षिणपंथी विचारधारा की कटु आलोचक थीं। गौरी  अपने पिता पी लंकेश द्वारा शुरू की गई कन्नड़ भाषी मैगजीन ‘लंकेश पत्रिका’ का संचालन कर रही थीं। उन्होंने हाल ही में  गुजरात दंगों पर आधारित पत्रकार राणा अय्यूब की किताब ‘गुजरात फाइल्स’  का कन्नड़ में अनुवाद किया था। माना जा रहा है कि उनकी हत्या के पीछे दक्षिणपंथी संगठनों का हाथ हो सकता है।

गौरी लंकेश की हत्या ने डाक्टर नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे और डाक्टर एमएम कुलबर्गी की हत्याओं की याद ताजा कर दी है। इन तीन विद्वान लेखकों की भी इसी तरह हत्या कर दी गई थी। सवाल यह है कि लगातार की जा रही लेखकों, पत्रकारों, विचारकों की हत्या का यह सिलसिला आखिर कब थमेगा?

नरेंद्र दाभोलकर-

जाने माने विचाकर एवं सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की चार साल पहले 20 अगस्त 2013 को  पुणे (महाराष्ट्र) में हत्या कर दी गई थी। पद्मश्री से सम्मानित 68 वर्षीय दाभोलकर पर हत्यारों ने उस वक्त हमला किया जब वे सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे। सिर पर करीब से गोलियां लगने से उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई थी। चार साल बीतने के बाद भी सरकार दाभोलकर के हत्यारों का पता लगाने में नाकाम रही है।

नरेंद्र दाभोलकर अंधविश्वास के विरोध में वर्षों से मुहिम चला रहे थे। उन्होंने सन 1989 में ‘महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति’ की स्थापना की। दाभोलकर ने अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ लोगों को जागरूक करने के लिए कई किताबें लिखीं।

गोविंद पानसरे-

वामपंथी विचारक गोविंद पानसारे की हत्या 20 फरवरी 2015 को हुई। उन पर भी हमला सुबह के वक्त किया गया जब वे घर से टहलने निकले थे। मोटरसाइकिल पर आए हत्यारे उन पर गोलियां चला कर भाग गए थे। घायल पानसरे को अस्पताल पहुंचाया गया जहां पांच दिन तक मौत से लड़ने के बाद उनका देहांत हो गया। 82 वर्षीय पानसारे लगभग पांच दशक से सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय थे। वे सांप्रयादिक ताकतों के विरोध में लगातार आवाज उठाते रहते थे। इसके चलते वे दक्षिणपंथी संगठनों के निशाने पर थे। पानसरे के हत्यारों का भी अभी तक कोई पता नहीं लग पाया है।

डाक्टर एमएम कलबुर्गी-

प्रख्यात विचारक और तर्कवादी डाक्टर एमएम कुलबर्गी को 30 अगस्त 2015 को उनके घर के दरवाजे पर गोली मार दी गई थी। कर्नाटक के धारवाड़ स्थित 77 ‍वर्षीय कलबुर्गी के घर पर मोटरसाइकिल से आए दो लोगों में से एक ने खुद को छात्र बता कर उनसे दरवाजा खुलवाया और बात करते-करते उन्हें गोली मार दी। इसके बाद वह अपने साथी के साथ भाग गया। कुलबर्गी मूर्तिपूजा के घोर विरोधी थे। माना जाता है कि इसी के चलते दक्षिणपंथी संगठन उनसे नाराज थे।

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