अनुपमा के हत्यारे पति को मिली आजीवन कारावास की सजा

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अनुपमा हत्याकांड एक ऐसी वारदात जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया. आज इस मामले की सुनवाई थी. कोर्ट ने आरोपी पति राजेश गुलाटी को उम्रकैद की सजा सुनाई और 15 लाख का जुर्माना पेश करने का आदेश दिया. पिछले सात सालों से चल रही यह कानूनी लड़ाई में आज अनुपमा के घरवालों को इन्साफ मिल चुका है. इस फैसले ने साबित कर दिया है कानून के घर में देर है लेकिन अंधेर नहीं.

2010 में देहरादून में राजेश गुलाटी ने जिस हत्याकांड को अंजाम दिया था उसे सुनकर लोगों का कलेजा दहल गया था. राजेश गुलाटी ने अपनी तलाकशुदा दूसरी पत्नी के चक्कर में अनुपमा को मौत के घाट उतार दिया था. सात साल पहले 2010 में अंजाम दिए गए इस हत्याकांड में अब राजेश गुलाटी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.

अनुपमा और राजेश की कहानी भी आम प्रेम कहानी की तरह शुरू हुई थी. साल था 1997. दिल्ली विश्वविद्यालय में दोनों पढ़ाई कर रहे थे और उसी दौरान दोनों की मुलाक़ात हुई. दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी का टॉपर राजेश पढ़ने में बेहद तेज था. उसे पढ़ाई के दौरान बहुत से पुरस्कार भी मिले थे. दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी और दोनों में प्रेम हो गया और उन्होंने जल्द ही शादी कर ली. हालाँकि, अनुपमा के परिवार वाले इस शादी के बिलकुल खिलाफ थे लेकिन अनुपमा ने फिर भी राजेश से शादी की.

शादी के बाद राजेश को बहुत नौकरी के ऑफर आए और उसने नौकरी करनी शुरू कर दी. अनुपमा और राजेश दोनों 2008 में देहरादून में सेटल हो गए. दोनों का परिवाहिक जीवन भी अच्छा चल रहा था लेकिन अनुपमा को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं होगा कि उसके ऊपर कितनी बड़ी मुसीबत आने वाली है. न जाने कब उसका पति राजेश गुलाटी कोलकाता की एक लड़की को दिल दे बैठा. यहां तक कि अनुपमा के रहते राजेश ने उससे शादी भी रचा ली.

लेकिन झूठ और फरेब छुपाये नहीं छुपता है. अनुपमा को इस बात का पता चल गया और दोनों में रोज़ झगडे होने लगे. राजेश ने अनुपमा के दबाब में आकर अपनी कोलकाता वाली पत्नी को तलाक़ दे दिया. अनुपमा को इस बात की तसल्ली तो हुई लेकिन विश्वास नहीं हुआ. अनुपमा को फिर से भनक पद गई कि राजेश अब भी उसके साथ सम्बन्ध रख रहा है.

इसके बाद दोनों में खूब झगडे होने लगे और इस बार पहले से ज़्यादा झगडे होने लगे. देहरादून में रहते हुए दोनों को 2 साल हो चुके थे. 17 अक्टूबर 2010 को दोनों के बीच जबरदस्त झड़प हुई और हाथापाई के दौरान अनुपमा के सर में जबरदस्त चोट लगी. उसकी तत्काल मौत हो गई.

राजेश गुलाटी डर गया और उसे समझ नहीं आया कि यह कैसे हो गया. लेकिन किसी को बताने या फिर पुलिस को रिपोर्ट करने की बजाये उसने एक जुर्म को अंजाम दिया. ऐसा जुर्म जिसकी कल्पना करना भी नामुमकिन है. राजेश ने तय किया कि वह अनुपमा की बॉडी को दुनियां के सामने नहीं आने देगा.

उसने अनुपमा के शव को छुपाने का फैसला किया और उसने बाजार से फ्रीजर खरीदा और उसी में शव को बन्द कर दिया. फ्रीजर में शव रखने का मकसद था ताकि बॉडी सड़े नहीं और उसके बाद राजेश ने अनुपमा के शव के छोटे चुके टुकड़े कर मसूरी के जंगलों में फेकना शुरू कर दिए.

इस दौरान राजेश अपने दोनों बच्चो को कहता रहा कि मम्मी नाना और नानी के घर गई है और पड़ोसियों के पूछने पर राजेश कहता रहा कि अनुपमा अपने मायके गई है. और अगर अनुपमा के घरवाले पूछते तो राजेश कहता कि किसी सहेली के घर गई है.

अनुपमा के घरवालों को तसल्ली देने के लिए राजेश अनुपमा के ही फ़ोन से उसके घरवालों को मैसेज कर देता था. 2 महीने बाद आखिरकार उसका भाई देहरादून आया और उससे मिलने की जिद करने लगा. जब उसे कुछ संदेह हुआ तो पुलिस की मदद ली.

पुलिस ने तुरंत तफ्तीश शुरू कर दी और राजेश के घर में छापा मारा जिसके बाद सभी हैरान रह गए उसके फ्रीजर में बॉडी के टुकड़े बरामद हुए. चौकाने वाली बात यह है कि जेल में इतने दिन बंद होने के बाद भी राजेश को अपनी पत्नी अनुपमा की इस दरंदगी से हत्या करना का कोई मलाल नहीं है. हालाँकि, उसने कोर्ट को कभी नहीं बताया की उसने अनुपमा कि हत्या की है.

लेकिन, पाप छुपाए नहीं छुपता. 40 गवाहों और मौके से मिले सबूतों के आधार पर आखिरकार अदालत ने राजेश को दोषी ठहराया. अब कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद कि सज़ा सुनाई है.

 

 

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