मां झूमा देवी के दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़

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नेपाल सीमा से लगा चंपावत जिले का झूमा देवी का मंदिर निसंतान दम्पतियों को संतान सुख देने के लिए जाना जाता है. मां झूमा देवी के दर्शन के लिए देश भर से लोग आते है. मां झूमा देवी की ममता, श्रद्धा, आस्था ऐसी है कि सैकड़ों की संख्या में महिलाएं संतान की प्राप्ति के लिए रात भर मां का जागरण करती हैं.

माँ झूमा के मंदिर में सर पर ओढ़नी डालकर और खुद को पूरी तरह ढक कर सैंकड़ों महिलाएं संतान की आस में पूरी रात जागरण करती है. माना जाता है कि रात भर माँ झूमा की भक्ति करने के बाद माँ झूमा भक्तों को दर्शन देती है. स्वपन में ही संतान प्राप्ति के संकेत देती हैं. मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोगों का भी यही मानना हैं.

पूरी रात मां झूमा देवी का जागरण कीर्तन के बाद अगली सुबह मां के दो डोलों को हजारों की संख्या में श्रद्धालु खड़ी चढ़ाई में रस्सियों के सहारे जान जोख़िम में डालकर मंदिर तक लाते हैं. परंपरा के अनुसार रात भर माँ झूमा का जागरण करने वाली महिलाएं इन डोलों के नीचे से गुजरती हैं.

पुरुष इन डोलों को रस्सियों और कंधो से माँ के दरबार तक ले जाते है. यह मां की महिमा है कि खुद महिलाएं इस बात कि तस्दीक करती है कि मां के जागरण और आशीष से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई है.

झूमा देवी के मंदिर में वो लोग आते है तो जो किसी कारणवश निसंतान रह जाते है. कहा जाता है कि जो महिला माँ झूमा का जागरण पूरी रात करती है उन्हें संतान कि प्राप्ति जल्द ही होती है. शायद इसीलिए मान्यता है कि मां झूमा के मन्दिर में महिलायें दो दिन तक पूरी तरह से निर्जला व्रत रख सन्तान की प्राप्ति करती हैं.

मंदिर में आस्था रखने वाले लोग दूर दूर से माँ के दर्शन करने आते है. संतान की प्राप्ति के लिए महिलाएं दो दिन तक पूरी तरह से निर्जला व्रत रखती है. मंदिर में आई सैंकड़ो महिलाएं रात भर माँ की आराधना करती है.

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