जानिए आखिर क्यों लोग आते है गोलू देवता के मंदिर में…

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जानिए आखिर लोग क्यों आते है गोलू देवता के मंदिर में...
जानिए आखिर लोग क्यों आते है गोलू देवता के मंदिर में...

जैसा की आप सभी जानते हो की, उत्तराखंड को देव भूमि के नाम से भी जाना जाता है , क्योकिं उत्तराखंड में कई देवी देवता वास करते है जो हमारे ईष्ट देवता भी कहलाते है जिसमे से एक है , गोलू देवता।

अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में स्थित गोलू देवता के मंदिर में…

अभी तक आपने लोगों को मंदिरों में जाकर अपनी मुरादें मांगते देखा होगा, लेकिन अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में स्थित गोलू देवता के मंदिर में केवल चिट्ठी भेजने से ही मुराद पूरी हो जाती है। जिन्हें कहीं से न्याय न मिले वह गोलू देवता की शरण में पहुंचते हैं और लोगों का मानना है कि यह देवता न्याय करते ही हैं। यहां स्टांप पेपर पर लिखकर लोग मन्नतें मांगते हैं और मन्नतें पूरी होने पर भगवान को धन्यवाद, घंटियां चढ़ाकर दी जाती है। गोलू देवता के प्रति लोगों की आस्था ये घंटियां ही बयां करती हैं। कई घंटियां तो 50-60 या उससे भी ज्यादा पुरानी हैं।

लोग मंदिर में आकर 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक के…

लोग मंदिर में आकर 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक के गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर लिखित में अपनी-अपनी अपील करते हैं और जब उनकी अपील पर सुनवाई हो जाती है तो वे फीस के तौर पर यहां आकर घंटियां तथा घंटे बांधते हैं। प्रेम विवाह के लिए युवक-युवती गोलू देवता के मंदिर में जाते हैं। मान्यता है कि यहां जिसका विवाह होता है उसका वैवाहिक जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है।

क्या आप जानते हैं कि गोलू देवता को न्याय का देवता क्यों कहा जाता है ?

कहा जाता है कि बहुत साल पहले ग्वालियर कोट चम्पावत में झालुराय का राजा था। उनकी सात रानियां थी। राज्य में चारो और खुशहाली थी । राजा अपनी प्रजा का हर समय ध्यान रखता था । हर तरफ खुशहाली होते हुए भी राज्य में एक कमी थी , वो कमी थी की राजा की सात रानियाँ होते हुए भी उनका कोई पुत्र नहीं था। इस वजह से राजा हर वक्त दुखी रहने लगा । सोचने लगा की मेरा वंश आगे कैसे बढेगा , एक दिन राजा को लगा की राज्य ज्योतिष से परामर्श लिया जाये। राजा परामर्श लेने के लिए ज्योतिष के पास गया। और अपनी व्यथा सुनाई, राजा की बात सुन कर ज्योतिषी ने सुझाव दिया की आप भैर महाराज को प्रसन्न करें, आपको अवश्य ही सन्तानसुख प्राप्त होगा। ज्योतिषी की बात मानते हुए राजा ने भैरव पूजा का आयोजन किया ।

भैरव जी महाराज ने राजा को सपने में दर्शन दिया और कहा की आप के भाग्य में…

भैरव जी महाराज को प्रसन्न करने का प्रयास किया, भैरव जी महाराज ने राजा को सपने में दर्शन दिया और कहा की आप के भाग्य में सन्तान सुख नहीं है। अत: मै स्वयं आप के पुत्र के रूप में जन्म लूँगा । इसके लिए आप को आठवीं शादी करनी होगी , जिससे आप को पुत्र की प्राप्ति होगी ,जब राजा सुबह उठा बहुत प्रसन्न हुआ और अपनी आठवीं रानी की तलाश में लग गया।

पानी दुढ़ते हुआ राजा को एक तालाब नजर आया, जब राजा तालाब के पास पहुच तो देखता है कि…

एक दिन राजा शिकार के लिए जंगल की ओर निकला, शिकार को दुढ़ते दुढ़ते बहुत दूर निकल गया। जब राजा को पानी की प्यास लगी तो, राजा ने सैनिकों को पानी लाने भेज। बहुत देर होने पर जब कोई सैनिक नही आया तो राजा स्वयं पानी की तलाश में निकल पड़ा। पानी दुढ़ते हुआ राजा को एक तालाब नजर आया, जब राजा तालाब के पास पहुच तो देखता है, कि उसके सैनिक मुर्छित अवस्था में तालाब के किनारे पड़े हुए है। उसके बाद राजा स्वयं ही पानी के लिए हाथ तालाब की और बढ़ता है की अचानक आवाज आती है ,”ये तालाब मेरा है यदि आप ने मेरी बात नही मानी तो आप का भी वही हाल होगा जो इन सैनिकों का हुआ है।

राजा ने हार मान ली उसके बाद नारी स्वयं जाकर 

राजा ने जब सामने देखा तो एक बहुत सुन्दर नारी खड़ी थी, राजा ने उस नारी कहा कि मै शिकार के लिए जंगल की ओर निकला था, और शिकार करते करते बहुत दूर निकल गया, जब पानी की प्यास लगी तो मैंने सैनिकों को पानी लेने के लिए भेजा, राजा ने परिचय देते हुए कहा कि मै चम्पावत का राजा झालुराय हु। तब उस नारी ने कहा कि मैं पंचदेव देवताओं की बाहें कलिंगा हूँ। अगर आप राजा हैं – तो बलशाली भी होंगे – जरा उन दो लड़ते हुए भैंसों को छुडाओ तब मैं मानूंगी की आप गढी चम्पावत के राजा हैं। राजा ने जब उन भैंसों को लड़ते देखा तो कुछ समझ नही आया की कैसे छुड़ाया जाय, राजा ने हार मान ली उसके बाद नारी स्वयं जाकर उन भैसों को छुड़ाया ।

कुछ समय बीतने के बाद राजा आठवीं रानी गर्भवती हुई…और 

राजा ये सब देख कर आश्चर्य चकित हो गया उस नारी के इस करतब पर – तभी वहाँ पंचदेव पधारे और राजा ने उनसे कलिंगा का विवाह प्रस्ताव किया। पंचदेव ने मिलकर कलिंगा का विवाह राजा के साथ कर दिया और राजा को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया। कुछ समय बीतने के बाद राजा आठवीं रानी गर्भवती हुई। ये बात राजा की दूसरी रानी को पसंद नही आई रानियों ने सोचा की यदि इसका पुत्र हो गया तो हमारा मान कम हो जायेगा और राजा भी हमसे अधिक प्रेम इससे ही करेगा। रानियों ने योजना बनाई, की उस रानी के पुत्र को जन्म लेते ही मार देंगे।

जब पुत्र का जन्म होने वाल था तो ,आठवीं रानी के आँखों पर पट्टी बाध दी गई ,और जैसे ही पुत्र का जन्म हुआ तो उसको फेंक गोशाला में दिया गया और रानी के सामने लोंड सिलट (मसला पिसने का एक साधन ) रख दिया गया , जब रानी ने देखा की उसका पुत्र नही लोंड सिलट हुआ तो रानी बहुत दुखी हुई ।

बालक उस घोड़े को रोज पानी पिलाने के लिए नदी पर लेकर…

उस बच्चे को गोसाला में फेकने के बाद भी वह जिंदा था, सातों रानियों ने फिर उसे एक बक्से में बंद करके नदी में फेंक दिया , बक्सा नदी में तैरता हुआ एक मछवारे के जाल में फँस गया। जब मछवारे ने बक्सा खोला तो उसमे एक प्यारा बच्चा था , वह उस बच्चे को घर ले आया और उसका पालन पोषण किया, मछवारे नें उस बालक को एक कांठ( लकड़ी ) का घोड़ा दिया , बालक उस घोड़े को रोज पानी पिलाने के लिए नदी पर लेकर जाता था। उसी नदी पर राजा की सातों रानियाँ भी आया करती थी।

क्या कभी औरत से भी लोड़ सिलट जन्म लेता है…

बालक जब घोड़े को पानी पिलाता तो, रानी कहती थी ,की कही काठ का घोड़ा भी पानी पीता है क्या?, इस पर बालक का जवाब होता , क्या कभी औरत से भी लोड़ सिलट जन्म लेता है क्या ऐसा कहते ही रानियों चुप हो जाती , ये बात जब आठवीं रानी को पता चली तो रानी बालक से मिलने नदी पर गई।

सातों रानियों को फासी देने का हुक्म दे दिया

हर रोज की तरह वही हुआ बालक आया और अपने घोड़े को पानी पिलाने लग गया, सातों रानी ने भी वही कहा की काठ का घोड़ा भी पानी पीता है क्या ? बालक ने कहा क्या कभी औरत से भी लोड़ सिलट जन्म लेता है, ये बात कहते ही आठवीं रानी बोली तुम ऐसा क्यों कह रहे हो। बालक ने रानी को पुरी बात बताई की किस तरह मुझे मारने की कोशिश की गई , ये बात जब राजा को पता चली तो राजा ने सातों रानियों को फासी देने का हुक्म दे दिया।

वह बालक बड़ा हो कर एक न्याय प्रिय राजा बना ,और आज भी उन्हें भगवान के रूप में पूजा जाता है।

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