सौ छात्रों के स्कूल में एक भी अध्यापक नहीं

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स्कूल में एक भी अध्यापक ना होने से गुस्साए ग्रामीणों ने स्कूल पर जड़ा ताला

स्कूल में एक भी अध्यापक ना होने से गुस्साए ग्रामीणों ने स्कूल पर जड़ा ताला

उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ विकासखंड के रौन्तल गाँव का है मामला

देहरादून : खुद को डबल इंजन की सरकार के तमगे से नवाजने वाली त्रिवेंद्र सरकार में शिक्षा व्यवस्था किस कदर बेपटरी हो चुकी है इसकी बानगी सीमान्त जिले उत्तरकाशी में देखने को मिल रही है।  शिक्षा व्यवस्था की हालत सुधारने के दावे और ड्रेस कोड के चक्रव्यू में उलझे शिक्षा मंत्री को शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं होगा कि उनके राज में हाईस्कूल स्तर का एक ऐसा विद्यालय भी है जहाँ विद्यार्थी तो हैं लेकिन नाम लेने को एक भी अध्यापक नहीं।  हैरानी तो इस बात की है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को यह तक पता नहीं कि उस स्कूल में अध्यापक कब से नहीं है और कब तक भेजा जाएगा।

उत्तरकाशी जिले के प्रवेश द्वार चिन्यालीसौड़ विकासखंड में ब्लॉक मुख्यालय से करीब तीस किलोमीटर दूर है  रौंतल गाँव।  गाँव में करीब तीन दशक पहले एक जूनियर हाईस्कूल खोला गया था,  जिसमें  आसपास के अदनी,  कोट, जसपुर सहित करीब दर्जनभर गांवों से बच्चे पढने आते थे।  आज जब पलायन की मार से आसपास के गाँव खाली होते जा रहे हैं  तब भी इस जूनियर हाईस्कूल के करीब  100 बच्चे अपने भविष्य को दाँव पर लगाकर पढ़ने को मजबूर हैं।

लेकिन प्रशासन को तो मानो न स्कूल की फ़िक्र है और न ही उन नौनिहालों की।  रौन्तल की प्रधान दशरथि देवी कि मानें तो उनके गाँव के स्कूल में पिछले दो साल से 100 बच्चों को एक ही अध्यापक पढ़ा रहे हैं  और अध्यापक बेचारा भी तब पढ़ाये जब उसे स्कूल की कागजी कार्रवाई से फुरसत मिले।  दो साल से शिक्षा विभाग के आगे अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर गुहार लगाते लगाते जब ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया तो सोमवार को उन्होंने स्कूल खुलते ही स्कूल में ताला जडकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।  इस दौरान स्कूल आये बच्चों ने भी धरने में साथ देते हुए ग्रामीणों के साथ स्कूल परिसर में नारेबाजी की।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को खुद नहीं पता

जिले के  बेसिक शिक्षा अधिकारी राय सिंह रावत से जब फोन पर इस बाबत सवाल पूछ गया तो उन्हें यह भी पता नहीं कि स्कूल कहाँ पर है और यहां कितने बच्चे पढ़ते हैं साथ ही अध्यापक कब से नहीं हैं।  दैनिक उत्तराखंड ने जब ग्राम प्रधान के हवाले से बेसिक शिक्षा अधिकारी से पूछा कि इस विद्यालय में अध्यापक क्यों नहीं है तो उन्होंने कहा कि वहां पर तैनात अध्यापक का इसी सत्र में किसी अन्य विद्यालय में तबादला हो गया।

हमने जब अधिकारी से सवाल पूछा कि उस अध्यापक का तबादला कहाँ हुआ है तो अधिकारी अपने मातहत कर्मचारी के तबादले की जानकारी तक नहीं दे पाए।  ग्राम प्रधान की मानें तो पिछले दो साल से सिर्फ एक अध्यापक ही विद्यालय में है जबकि अधिकारी हाल ही में एक अध्यापक के तबादले कि बात कह रहे  हैं।  इससे साफ़ जाहिर होता है कि सरकारी नुमाइंदे अपनी नाक बचाने के लिए मनगढ़ंत कहानी गढ़ कर झूठी तस्वीरें पेश कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्री के दावों की निकली हवा

प्रदेश में शिक्षा की सुधार के लिए नए-नए प्रयोग करने में जुटे शिक्षा मंत्री के दावों की हवा निकल चुकी है। 100 बच्चों वाले इस विद्यालय में एक भी अध्यापक नहीं है।  ऐसे में जब पहाड़ के स्कूल बिना अध्यापकों के चल रहे हैं तो सरकार के लिए इससे शर्मनाक और क्या हो सकता।

जब ग्रामीण पिछले दो साल से शिक्षा विभाग से अध्यापकों की नियुक्ति की गुहार लगा रहे हैं तब विभाग के अधिकारी सरकार के सामने इस समस्या को क्यों नहीं रख रहे हैं।  देखना दिलचस्प होगा कि दो सालों से सरकार को गुमराह करने वाले अधिकारियों पर अब सरकार क्या एक्शन लेती है।

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