अल्मोड़ा में खुदाई के दौरान मिले 9 हजार साल पुराने शिव मंदिर

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अल्मोड़ा में खुदाई के दौरान मिले 9 हजार साल पुराने शिव मंदिर
अल्मोड़ा में खुदाई के दौरान मिले 9 हजार साल पुराने शिव मंदिर

उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया स्थित प्राचीन वक्रमुंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में नौ और शिव मंदिर मिले हैं।पुरातत्व विभाग का अनुमान है कि ये मंदिर करीब नौ हजार साल पुराने हो सकते हैं।

हल्द्वानीः उत्तराखंड में अल्मोड़ा के ऐतिहासिक जागेश्वर धाम की तरह चौखुटिया में भी नौ पौराणिक शिव मंदिर मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इन मंदिरों को खोजा है। ये मंदिर काफी पुराने हैं और जल्द ही इतिहासकारों एवं पुरातत्व विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम यहां का दौरा करेगी।

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अल्मोड़ा स्थित विभागीय सूत्रों के अनुसार चौखुटिया के प्राचीन बक्रमुंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में मंदिरों की श्रृंखला मिलने की जानकारी मिली है। विभाग की तकनीकी टीम को मंदिर परिसर में स्थलीय निरीक्षण के दौरान यह सफलता मिली।

अफसरों ने बताया कि जो मंदिर मिला है। इस बारे में जांच की जा रही है। अफसरों ने बताया कि अब तक यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ये मंदिर 9 हजार साल पुराना हो सकता है। अफसरों ने बताया कि मंदिर की खुदाई के लिए भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग देहरादून मंडल की ओर से केन्द्र सरकार ने अनुमति दे दी है।

क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अधिकारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि कस्बे के वक्रमुंडेश्वर महादेव मंदिर में बीते दिनों स्थलीय निरीक्षण के बाद शिव मंदिरों की श्रृंखला की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने मंदिर के बारे में कई जानकारियां जुटाई। स्थानीय लोगों से मामले की जानकारी ली जा रही है।

अल्मोड़ा जिले में ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण तथा पुरातत्व विभाग के अधीन संरक्षित तथा संरक्षण के लिए चिह्नित 80 से अधिक धरोहरें भगवान भरोसे हैं।

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इतिहास और संस्कृति की वाहक इन धरोहरों की सुरक्षा की केंद्र तथा राज्य सरकार को कोई चिंता नहीं है। राज्य के अंतर्गत क्षेत्रीय पुरातत्व विभाग ने कुमाऊं मंडल में 26 धरोहरों को संरक्षित किया है। इसमें अल्मोड़ा जिले में 12, बागेश्वर में दो, पिथौरागढ़ में चार और चंपावत में आठ धरोहरें शामिल हैं। इसके अलावा विभाग ने 13 अन्य धरोहरों को भी संरक्षण के लिए चिन्हित किया है। धरोहरों की देख-रेख का जिम्मा विभाग में तैनात मात्र चार स्मारक परिचारकों पर है।

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