मंत्री के आदेश को शिक्षकों ने दिखाया ‘ठेंगा’

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  • 1 अगस्त से लागू होने वाले ड्रेस कोड का शिक्षकों ने किया बहिष्कार
  • कई स्कूलों में इक्के-दुक्के शिक्षक-शिक्षिकाएं पहुंची वर्दी में
  • कईस्कूलों के प्रिंसिपलों ने आदेश न पहुंचने की कही बात

देहरादून: प्रदेश के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के आदेशों की हवा निकल गई है। 1 अगस्त से शिक्षकों को अनिवार्य रूप से ड्रेस कोड लागू करने के शिक्षा मंत्री के आदेशों को शिक्षकों ने ठेंगा दिखाया है। मंत्री के फरमान की धज्जियां उड़ाते शिक्षका आदेश लागू होने के पहले दिन बिना ड्रेस के स्कूलों में पहुंचे हैं। हालांकि कहीं अपवाद स्वरूप कुछ शिक्षक-शिक्षिकाएं जरूर वर्दी में स्कूल पहुंचे हैं। बाकी सभी ने ड्रेस कोड का बहिष्कार किया है। राजकीय शिक्षक संघ के आह्वान पर शिक्षकों ने वर्दी भत्ता के साथ उनकी लंबित मांगों को पूरा करने पर ही आदेशों का पालन करने की मांग दोहराई है।

प्रदेश के सभी बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में 1 अगस्त 2017 से ड्रेस कोड लागू होना था। हालांकि पहले यह आदेश 1 जुलाई से था, लेकिन बाद में इसमें सशोधन करके 1 अगस्त कर दिया गया, लेकिन शिक्षक लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। शिक्षा महकमा आजकल ड्रेस कोड को लेकर खूब चर्चाओं में है। जब से शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य करने के आदेश दिए हैं, तब से शिक्षकों में खलबली मची है। शिक्षक वर्दी पहनने को तैयार नहीं हैं, तो शिक्षा मंत्री भी पीछे हटने को कतई तैयार नहीं है।

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शिक्षक नेताओं के साथ ही मंत्री के लिए यह नाक का सवाल बना गया है। मंत्री फैसले को वापस लेने को तैयार नहीं है। पिछले हफ्ते शिक्षक संगठनों ने बैठकें करके 1 अगस्त से लागू होने वाले ड्रेस कोड के बहिष्कार का ऐलान किया था, जिसके बाद शिक्षा मंत्री ने भी आदेश के अनुसार वर्दी पहन कर स्कूल न पहुंचने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। शिक्षकों के बहिष्कार के बीच शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने धमकी भरे लहजे में कहा कि हर हाल में 1 अगस्त से ड्रेस कोड लागू होकर रहेगा। चाहे शिक्षक कितना भी चिल्ला लें। मंत्री ने यहां तक भी कहा कि जिन शिक्षकों को ड्रेस मंजूर नहीं है वह घर बैठ जाएं। राज्य में लाखों शिक्षित बेरोजगार हैं।

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मंत्री ने शिक्षकों को यह भी नसीहत दी कि वह ड्रेस कोड की चिंता न करें। वह केवल छात्र-छात्राओं को पढ़ाने में अपनी इनर्जी लगाएं। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की योजना पर काम करें। ड्रेस कोड कोई मामला नहीं है यह सरकार का काम है। मंत्री के इस बयान के बाद शिक्षक संगठनों में उबाल है। शिक्षक नेताओं ने जबदस्ती वर्दी थोपे जाने पर इसका विरोध करने की धमकी दी है। ड्रेस कोड को लेकर मंत्री और शिक्षकों संघ के बीच चल रही जंग में आखिर किसकी जीत होती है। बड़ा सवाल यह है कि ड्रेस कोड पर मचा यह हंगामा कहीं शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त न कर दे। इस पर सरकार और शिक्षकों को स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों के बारे में एक बार गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

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