शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक, मंत्री ने जारी किए आदेश

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अनुरोध के आधार पर अब नहीं होंगे शिक्षकों के स्थानांतरण
तबादलों के लिए लगाए गए प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही आगे बढ़ेगी कार्रवाई

देहरादून: शिक्षा विभाग में यह साल भी सून्य सत्र घोषित हो सकता है। सरकार ने अनुरोध के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया पर रोक लग गई है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने शिक्षकों के स्तर से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने के बाद स्थानांतरणों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। उनका कहना है कि तबादलों के लिए शिक्षकों ने मेडिकल और उपचार प्रमाण पत्र बनाए हैं। उन्होंने इसमें मेडिकल बोर्ड की मिलीभगत की भी बात कही है।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस साल पारदर्शिता के लिए शिक्षकों के तबादलों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई थी। अधिकांश शिक्षक वर्षों से दुर्गम में सेवाएं दे रहे हैं। जरूरतमंद एवं दिव्यांग शिक्षकों की मद्द के लिए उन्होंने अनुरोध के आधार पर तबादलों की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बडङी संख्या में अध्यापकों ने फर्जीवाड़ा कर दस्तावेज बनवाकर आवेदन किया है।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि महानिदेशालय में गठित शिकायत प्रकोष्ठ को शिक्षकों के चिकित्सा प्रमाण पत्रों को लेकर गंभीर शिकायतें मिली हैं। बीमारी के झूठे प्रमाण पत्र लगाए हैं। शिक्षकों ने एनओसी के लिए अफसरों को रिश्वत देने की बात भी कही है। यहां तक कि तला के लिए फर्जी प्रमाण पत्र भी स्थानांतरण के लिए लगाए गए हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा कि तबादलों के लिए बड़ा खेल हुआ है। इसलिए तबादला प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है। कहा कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर होने वाले तबादलों से कई पात्र शिक्षकों के साथ अन्याय हो जाता। ऐसे में प्रमाण पत्रों की जांच कराए बिना तबादले न करने का निर्णय लिया गया है।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि शिक्षकों के तबादलों में खूब खेल हुए हैं। 31 साल से एक शिक्षक अति दुर्गम में तैनात रहा, लेकिन प्रमोशन के बाद उसे फिर सी कैटेगिरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि ऐसा एक नहीं कई उदाहरण हैं। कहा कि गंभीर बीमारी से ग्रसित शिक्षकों को सुगम में तैनाती दी जाएगी। उन्होंने कहाक कि तबादलों के लिए लगाए गए प्रमाण पत्रों जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

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