हरेला पर्व मानाने अपने गाँव पहुंचे ‘हरदा’

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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने गाँव मोहनरी  में मनाया हरेला

देहरादून :  मानसून के आगाज के साथ में हरेला कि शुरुआत भी हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  भी इस बार हरेला मानाने अपने गाँव मोहनरी  अल्मोड़ा पहुंचे।  मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत ने मानसून की  शुरुआत साथ ही पूरे प्रदेश में हरेला पर्व को  बड़े पैमाने पर मानाने का प्रयास किया था ।

यही नहीं हरदा ने अपने कार्यकाल में  हरेला को लेकर राजधानी में भी  सरकार कि ओर से कई कार्यक्रम आयोजित करवाए थे।  बीती सात जुलाई को  हरीश रावत ने अपने राजपुर रोड स्तिथ आवास पर भी हरेला कार्यक्रम का आयोजन करवायाजहाँ पर बड़ी संख्या में लोगों ने हरेला की  शुरुआत धान कि बुवाई के साथ की  वर्तमान सरकार की बात करें तो अभी तक सरकार का हरेला को लेकर कोई प्रस्तावित कार्यक्रम सामने नहीं आया है।

रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री  ने अपने गाँव में हरेला पर्व को मनाते हुए अपने घर में हरेला पर पेड़ लगाया। साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को उसकी फोटो भेजकर उनसे आग्रह किया कि राज्य में हरेला पर्व उतने ही उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए जितना उनकी सरकार के समय इसके प्रयास किए गए थे।

उन्होने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री की अपील स्वीकार कर अपने गांव जाकर हरेला में भागीदारी की है।   कुमांऊ में हरियाली का त्योहार हरेला धूम-धाम से मनाया जाता है. सात अनाजों को मिलाकर हरेला बोया जाता है।नौ  दिनों तक सुबह शाम हरेला का पालन पोषण किये जाने के बाद दसवें दिन  हरेला को काटा जाता है।

इस मौके पर बड़े अपने बच्चों को तरक्की का आशीर्वाद देते हैं। हरेला काटने के साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाता है। कई सदियों से हरेला पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है. नौकरी के लिए बाहर गए युवा हरेले में बड़ों का आशीर्वाद लेने श्रावण माह के पहले दिन घर पहुंचते हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शंकर ने पिया और संसार को हराभरा करने का संदेश दिया। इसीलिए हरेले के दिन से एक माह तक श्रावण माह में शिव को जल चढाया जाता है।

 

 

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