देहरादून की गायत्री ने पीएम और अब चमोली की ‘गायत्री’ ने जीता सीएम का दिल

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  • राइंका कांडई की छात्रा ने किया सीएम का फोन
  • स्कूल में शिक्षकों की कमी को दूर करने को लेकर लगाई गुहार
  • सीएम ने लिया मामले का संज्ञान, शिक्षा सचिव को दिए निर्देश

देहरादून: देहरादून की गायत्री ने पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम में स्वच्छ भारत अभियान के तहत रिस्पना नदी की गंदगी दूर करने की बात उठाकर पूरे देश में चर्चाओं के केंद्र में रही थी। तब गायत्री के पहल की सभी ने सराहना की थी। खुद पीएम मोदी ने गायत्री के जज्बे और हौंसले की तारीफ करते हुए इसे प्रेरणा का केंद्र बताया। अब प्रदेश के सुदूरवर्ती चमोली जिले के सुदूरवर्ती विकास खंड घाट के राजकीय इंटर कालेज कांडई की गायत्री राठौर ने अनूठी पहल चर्चाओं में है। गायत्री ने स्कूल सीधे मुख्यमंत्री को फोन कर स्कूल में शिक्षकों की कमी की बात उठाई। गायत्री के इस कदम ने सीएम का दिल जीत लिया। सीएम ने भी तत्काल शासन को फोन करके संबंधित में शिक्षकों की तैनाती के निर्देश दिए।

प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में छात्रों का भविष्य अंधकारमय बनता जा रहा है, लेकिन हिम्मत दिखाते हुए चमोली जिले की एक स्कूली छात्रा ने मुख्यमंत्री को सीधे फोन करके स्कूल का पूरा हाल बताया। मुख्यमंत्री ने भी विद्यालय में अध्यापकों की कमी होने पर छात्रा के फोन का संज्ञान लेकर सचिव शिक्षा को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। चमोली जिले के विकास खंड घाट में स्थित राजकीय इण्टर कॉलेज कांडई माणखी में अध्ययनरत छात्रा गायत्री कठैत ने शनिवार को मुख्यमंत्री को फोन करके विद्यालय में अध्यापकों की भारी कमी होने की जानकारी दी, जिससे सैकड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है। दूरभाष पर अवगत कराने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सचिव शिक्षा को तत्काल मुख्य विषय के अध्यापकों की संबंधित स्कूल में तैनाती के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने गायत्री कठैत को इस पहल के लिए उसका धन्यवाद अदा किया और उसे भविष्य में भी इस प्रकार के कार्य करने के लिए प्रोत्साहित भी किया। सीएम ने गायत्री को फोन पर सरकार की ओर से हर संभव सहयोग करने का भी भरोसा दिया। ऐसा नहीं कि शिक्षकों की कमी किसी एक स्कूल में हो। इसी तरह प्रदेश के अन्य स्कूलों में भी शिक्षकों का घोर अभाव है, लेकिन सरकार फिलहाल क्रियान्वयन के बजाय महज बयानबाजी तक ही सिमटी हुई है। इसे बिडंबना ही करहेंगे कि पिछले चार माह से बड़े-बड़े बयान देकर शिक्षा मंत्री लोगों की वाह-वाही तो लूट रहे हैं, लेकिन सत्र प्रारंभ होने के बाद भी स्कूलों में मानकों के अनुरूप शिक्षकों की कमी को पूरा नहीं कर पाए। अतिथि शिक्षकों को लेकर भी सरकार गंभीर नहीं दिख रही है। छात्र हितों को देखते मुख्यमंत्री को स्कूलों में शिक्षकों की जल्द तैनाती की जानी चाहिए।

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