टिहरी झील पर बना पीपल डाली पुल खस्ताहाल, खतरे की जद में लाखों जिंदगियां

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  • नींद में सोया है जिला प्रशासन, कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है पीपल डाली पुल
  • प्रतापनगर क्षेत्र की करीब पांच लाख से अधिक की जनसंख्या करती है इस पुल से आवाजाही 

देहरादून: टिहरी झील पर बने पीपल डाली पुल के जर्जर हाल में पहुंच गया है। ऐसे में इस पुल से आवाजाही करना खतरनाक साबित हो रहा है। इस पुल से प्रतापनगर क्षेत्र करीब 5 लाख की आबादी आवाजाही करती है। ऐसे में यदि समय रहते पुल के मेंटेनेंस पर जिला प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो कभी भी पुल से बड़ा हादसा हो सकता है।

पीपल डाली पुल से प्रतापनगर की 5 लाख से ज्यादा आबादी आवागमन करती है। यात्रा सीजन में इस पुल पर लोड बढ़ जाता है। खतरे की जद में आने से पुल से आवाजाही कभी भी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है। पुल की जालियों के पास तार के रस्सों को सपोर्ट देने के लिये लगाया गया कड़े का वैल्डिंग उखड़ गए हैं। साथ ही पुल की शुरुआत में ही पुल को जोड़ने के लिये लगाई गई लोहे की प्लेट की वैल्डिंग भी उखड़ गई है, जिससे पुल को खतरा बन गया है।

खास बात यह है कि पुल का डामर भी उखड़ने लगा है और उससे सरिया दिखने लग गई है। जिससे गाड़ियों के टायर पंचर हो रहे हैं। गौर हो कि 3 साल पहले भी इस पुल के तार के रस्से टूट गये थे जिसको मरम्मत करने के बाद ठीक किया गया था। पीपल डाली पुल की मरम्मत कई सालों से नहीं होने के कारण पुल की दशा खराब हो गई है। पुल पर गाड़ियां चलनी मुश्किल हो गई हैं। कई बार पीपल डाली पुल के ऊपर गाड़ियां चलाते समय उखड़ी हुई लोहे की प्लेट गाड़ी के नीचे उछलकर फंस जाती हैए जिससे चेम्बर भी फट गये हैं। जबकि इस पुल को लेकर नियम बना है कि यहां एक बार में एक ही कार चलेगी लेकिन इस पुल में बेरोक-टोक एक साथ कई कारें चल रही हैं।

पुल में बनी हल्की दरारें भी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है। सबसे अहम बात यह है कि पीपल डाली पुल के मैंटेनेंस पर न तो टिहरी बांध प्रशासन टीएचडीसी का ध्यान है और नहीं लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन ही देखरेख कर रही है। ऐसे में पुल के जर्जर हाल में पहुंच गया है, जिससे कभी भी बड़ी घटना घट सकती है।

 

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