सदियों से उच्च शिक्षा का स्तम्भ रहा है उत्तराखंड

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हल्द्वानी। ज्ञान पर आधारित शिक्षा में दक्षता एवं मूल्यों को समाहित किया जाना जरूरी है, ताकि हमारे महाविद्यालयों में अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राएं बेहतर ज्ञान, शिक्षा व जीवन के संस्कार हासिल करते हुए समाज व राष्ट्र की सेवा मे अपना योगदान दे सके।

प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों के एक दिवसीय सेमीनार का शुभारम्भ करते हुए व्यक्त किये।

डा0 पाॅल ने कहा गुणवत्ता युक्त शिक्षा की जरूरत है। देवभूमि से जहाँ ज्ञान, संस्कार एवं चिन्तन पूरे विश्व में प्रसारित हुआ है। वही डाॅ. पाॅल ने उच्च शिक्षा मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि इससे उच्च शिक्षा में हर स्तर पर संवादहीनता समाप्त होंगी और इस प्रकार के आयोजन निश्चय ही भविष्य में सुखद परिणाम देंगे। हमें उत्तराखण्ड को शिक्षा के केन्द्र के रूप में और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है।

हमें प्रदेश के हर विश्वविद्यालय को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए ओर अधिक सार्थक प्रयास करने होंगे। इसके अलावा शिक्षा में गुणवत्ता के विश्वास को भी कायम करना होगा। इससे गुणात्मक सुधार होता है। उन्होनें बैठक में मौजूद महाविद्यालयों के प्राचार्यों से कहा कि उन्हें अपने महाविद्यालय में नेतृत्व प्रदान करना चाहिए। नेतृत्व के बिना विकास सम्भव नहीं है।

महामहिम डा0 पाॅल का स्वागत करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री डा0 धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा में अमूलचूल परिर्वतन करने के लिए कार्यरत है। किसी भी प्रकार के निर्णय जबरदस्ती थौपे नहीं जायेंगे, बल्कि सबसे विचार विमर्श कर रणनीति बनायी जायेगी। उन्होनें कहा कि उच्च शिक्षा में विशेष कार्य करने की जरूरत है।

डा0 रावत ने कहा कि प्रदेश मेे 100 महाविद्यालय कार्यरत है, अधिकांश महाविद्यालयों में रिक्त पडे प्राचार्यों के पदों को 15 दिन के भीतर भर दिया जायेगा। इसके लिए डीपीसी की जा चुकी है।

डा0 रावत ने कहा कि आगामी सत्र से शैक्षिक कलैण्डर लागू कर दिया जायेगा। उन्होनें निदेशक उच्च शिक्षा एवं अपर सचिव डा0 राघव लंगर को निर्देश दिये कि वह 15 जून तक नया शैक्षिक कलैण्डर लागू करने की कार्यवाही करें। उन्होनें स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में प्राध्यापकों एवं अन्य स्टाॅफ की तैनाती के प्रयास किये जा रहे हैं। 10 वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर कार्यरत प्राध्यापकों, प्राचार्यों को अवश्य ही स्थानान्तरित किया जायेगा।

उन्होनें बताया कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू किया जायेगा, इसके लिए विचार विमर्श भी किया जायेगा। प्रदेश के 22 महाविद्यालयों में वर्तमान में ड्रेस कोड प्रभावी है। वही बैठक में कुलपति कुमायूं विश्वविद्यालय डा0 डीके नौरियाल, कुलपति मुक्त विश्वविद्यालय डा0 नागेश्वर राव, कुलपति दून विश्वविद्यालय डा0 वीके जैन, कुलपति श्री देव सुमन विश्वविद्यालय डा0 यूएस रावत, कुलपति आवासीय विश्वविद्यालय अल्मोडा डा0 एचएस धामी, अपर सचिव उच्च शिक्षा डा0 राघव लंगर, निदेशक उच्च शिक्षा डा0 बीसी मेलकानी, के अलावा अध्यक्ष राज्य सहकारी बैंक दान सिंह रावत, जिलाध्यक्ष मनोज साह, प्रवक्ता डा0 अनिल डब्बू, मण्डल अध्यक्ष मनोज जोशी, जिला उपाध्यक्ष रघुवर जोशी, जिला मंत्री दयाकिशन पोखरिया, युवामोर्चा चतुर सिंह वोरा, आलम सिंह नदगली, युवा महामंत्री शरद पाण्डे, भावना मेहरा, राजेन्द्र जीना, मोहन पाल, रंजन बर्गली, नितिन कार्की, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बीना आर्य के अलावा प्रदेशभर के सैकडो प्रधानाचार्य, सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डा0 अनुराग अग्रवाल आदि मौजूद थे।

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