काश ! यात्रियों की बात मान लेता बस चालक

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काश चालाक और परिचालक यात्रियों की बात मान लेते तो शायद त्यूनी सड़क हादसा टल जाता। बुधवार को उत्तराखंड – हिमाचल की सीमा पर हुए दर्दनाक हादसे की जो वजह सामने आई हैं। उसपर अगर पहले से ही ध्यान दिया जाता तो शायद ये हादसा न होता।

बुधवार सुबह को विकासनगर से त्यूनी(कैराड़) के लिए रवाना हुई बस में मीनस के समीप खराबी आ गई थी। बस के स्टेयरिंग में तकनीकी दिक्कत आ गई थी। बस के खाई में गिरने से पहले संयोगवश गूमा गांव निवासी नरेश ने कूद कर अपनी जान बचाई।

नरेश मीनस के मीनस के समीप बस के स्टेयरिंग का नट निकल गया था। तब चालक ने जुगाड़ कर इसको ठीक कर दिया। उस दौरान यात्रियों ने इस पर ऐतराज भी जताया। बस को सड़क किनारे खड़ा करने को कहा, लेकिन फिर से बस गंतव्य के लिए रवाना हो गई।

मीनस से करीब 25 किमी आगे बस काल के गाल में समा गई। परिचालक तुलसी के अनुसार बस का कमानी पट्टा टूट गया। हालांकि परिवहन विभाग के मुआयने के बाद ही दुर्घटना के कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

क्षेत्र पंचायत सदस्य रमला, चंद्रमोहन शर्मा ने आरोप लगाया कि अटाल और मीनस के बीच का हिस्सा हिमाचल प्रदेश में पड़ता है। इस रूट पर अधिकांश खटारा बसे दौड़ती हैं। वाहनों की चेकिंग नहीं की जाती। उनकी फिटनेस भी नहीं होती।

वाहनों में क्षमता से अधिक सवारी ढोई जाती है। सड़क पर कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन दोनों ही राज्यों के जिम्मेदार महकमे हरकत में नहीं आए हैं। एआरटीओ प्रवर्तन विकासनगर रत्नाकर सिंह ने बताया ​कि बस का वर्ष 2016 में रजिस्ट्रेशन हुआ था। बस का फिटनेस भी है। टेक्निकल मुआयने के बाद ही दुर्घटना के कारण स्पष्ट हो सकेंगे।

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