‘आईएमपी’ के मकड़ जाल में फंसा पिटकुल

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  • 80 एमवीए के बाद 40 और 160 एमवीए के ट्रांसफार्मर भी कई तकनीकी खामियां
  • क्षमता से आधी लोडिंग डालने पर भी हांफ रहे ट्रांसफार्मर, कूलिंग के बावजूद 65 डिग्री तक हो रहे गर्म
  • कंपनी के काले कारनामों पर पर्दा डालता रहा पिटकुल प्रबंधन, अब हो रही महज खानापूर्ति

पंकज भट्ट, देहरादून: उत्तराखंड पावर ट्रांसमिशन कारपारेशन में खरीदे गए करीब 30 करोड़ के ट्रांसफार्मरों में बड़ा खेल हुआ है। इस बात की गवाही कारपोरेशन के ही अधिकारियों के पत्र दे रहे हैं। अब तक सिर्फ आईएमपी कंपनी के 80 एमवीए के ट्रांसफार्मर ही खराब बताए जा रहे थे, लेकिन असल बात यह है कि 40 और 160 एमवीए के ट्रांसफार्मरों में भी गड़बड़ी की शिकायतें मिलती रहीं, जिसे आईएमपी के कमीशनखोरी के मकड़जाल में फंसा प्रबंधन दबाता चला गया। इसके बावजूद प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने सिर्फ 80 एमवीए के ट्रांसफार्मरों के ही जांच के आदेश दिए हैं।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि प्रबंधन आईएमपी कंपनी से खरीदे गए 40 और 160 एमवीए के ट्रांसफार्मरों की जांच क्यों नहीं कराना चाहता है? क्यों सिर्फ 80 एमवीए के ट्रांसफार्मर की जांच के आदेश दिए गए हैं। क्या खरीद के बाद जांच के नाम पर भी आईएमपी से फिर से जांच के नाम पर भ्री  डील की गई है। इससे कहीं न कहीं निगम प्रबंधन की मंशा पर भी सवाल उठने लाजमी है। सवाल यह भी है कि इस जांच का कोई नतीजा भी निकलेगा या फिर दूसरे मामलों की तरह कहीं ट्रांसफार्मर घोटाला भी गुम हो जाएगा। इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि घोटालेबाज कंपनी को निगम के उच्चाधिकारी कमीशन की बेल के सहारे कहीं निर्दोष न बचा लें। ऐसा निगम में भी पहले भी होता रहा है कि जिसने आवाज उठाई उल्टी उन्हीं अधिकारियों पर गाज गिरा दी गई।

पिटकुल ने नए पुराने बिजली घरों को आधुनिक और अपडेट कराने के लिए वर्ष 2014 में हरियाणा की आईएमपी कंपनी से करीब 30 करोड़ के 20 ट्रांसफार्मर खरीदे, लेकिन आईएमपी कंपनी से खरीदे गए ट्रांसफार्मरों में लगातार तकनीकी त्रुटियां सामने आती रही हैं। आयल लीकेज होने के साथ ही निर्धारित लोड न ले पाने से बिजली लाइनें बार-बार ट्रिप हो रही हैं। कई बार ट्रांसफार्मर जल भी चुके हैं। झाझरा में 80 और हरिद्वार क्षेत्र में 40 और 160 एमवीएम के ट्रांसफार्मर इसके उदाहरण हैं। खास बात यह है कि ये ट्रांसफार्मर एैज पर स्पेसिफिकेशन नहीं पाए गए। इससे जहां पिटकुल को भारी वित्तीय नुकसान हुआ वहीं जनता को भी बार-बार बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

ट्रांसफार्मर में अनियमितता के घेरे में यूपीसीएल की क्रय समिति भी निशाने पर है। यह भी बता दें कि इस मामले को भाजपा ने पिछली सरकार में जोर-शोर से उठाया और मामले की बार-बार जांच की भी मांग की, लेकिन भाजपा की सरकार आते ही भाजपा नेताओं ने मौन साध लिया। भाजपा नेता रविंद्र जुगरान, प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल और सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने शासन में अपर सचिव ऊर्जा नीरज खैरवाल से जांच की मांग की, लेकिन आज तक इस दिशा में परिणाम सामने नहीं आए। अब जबकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है और सत्ता बदलने के बाद जो उम्मीद जताई जा रही है थी की अब शायद ऊर्जा निगम में भ्रष्टाचार और भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ जीरो आलरेंस के तहत कार्रवाई होगी उसकी दूर-दूर तक कहीं कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं।

फील्ड अधिकारी चिल्लाते रहे, प्रबंधन दबाता रहा

पिटकुल में ट्रांसफार्मर खरीद का मामला पूर्व प्रबंधन निदेशक एसएस यादव के कार्यकाल के दौरान का है। आईएमपी के ट्रांसफार्मरों में आ रही तकनीकी खामियों पर हालांकि समय-समय पर विभागीय फील्ड अधिकारी उच्चाधिकारियों को कमियां बताते रहे, लेकिन आईएमपी कंपनी से बड़े स्तर पर कमीशनखोरी की डील करने वाले प्रबंधन ने धृष्टराष्ट्र की तरह आंखों में पट्टियां बांधकर कंपनी का बचाव करता रहा। दैनिक उत्तराखंड की पड़ताल में हैरत करने वाली बातें सामने आई है।

हैरत की बात इसलिए भी कि ट्रांसफार्मर आर्डर से पहले ही आईएमपी के ट्रांसफार्मरों की सभी औपचारिकताएं पूरी की गई। यहां तक कि ट्रांसफार्मरों की विभागीय तकनीकी परीक्षण आनन-फानन में खरीद के बाद कराया गया। इस बावत अधिशासी अभियंता विद्युत परीक्षण एवं परिचाल खंड रूड़की अनुपम सिंह ने मुख्य अभियंता परिचालन एवं अनुरक्षण रूड़की को पत्र लिखकर 22 जुलाई 2014 को ट्रांसफार्मरों में एक नहीं 15 कमियां गिना कर इसके डिजाइन पर बदलाव की बात कही। ट्रांसफार्मर में ऑयल टैंक में कापर वायर कम होने से उसमें तेल भी दूसरे ट्रांसफार्मरों की अपेक्षकृत ज्यादा आ रहा है, जिससे ट्रांसफार्मर क्षमता के अनुरूप लोड नहीं ले पा रहे हैं और वह बार-बार ट्रिप हो रहे हैं।

23 दिसंबर 2014 को भी अधिशासी अभियंता अश्विनी कुमार ने भी मुख्य अभियंता को पत्र लिखकर ट्रांसफार्मर के लोड करंट समेत चार कमिया गिनाई है। 10 जनवरी 2015 को अधिशासी अभियंता सिडकुल हरिद्वार ने भी ट्रांसफार्मर की ड्राईंग में कई खामियां बताई। बताया गया कि 240 एमवीए के ट्रांसफार्मर निर्धारित लोड नहीं उठा पाया, जिसके बाद बाईपास कराकर उस पर 160 एमवीए की सप्लाई दी गई।

ये ट्रांसफार्मर क्षमता के अनुरूप लोड नहीं ले पा रहे हैं। नियमत: अधिकत 45 डिग्री तक ट्रांसफार्मर गर्म होते हैं, लेकिन ये आईएमपी के ट्रांसफार्मर 65 डिग्री तक गर्म होने की शिकायतें मिल रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। 16 जनवरी 2015 को सहायक अभियंता अमित कुमार ने भी ईई रामनगर रूड़की को पत्र लिखकर आईएमपी के 160 एमवीए के ट्रांसफार्मर की नार्मल टेप पर एचवी-आईवी का प्रसेंट इंपेंडेंस 10.027 दिया गया है, जो टेस्टिंग के दौरान 9.863 प्रसेंट निकला। दिलचस्प बात यह कि कम लोड पर कम से कम 4 मेगावाट और अधिकत 15 मेगावाट ट्रांसफार्मर लॉसेस प्रतिदिन आ रहा है।

अधिशासी अभियंता सिडकुल हरिद्वार एसके गुप्ता ने 06 फरवरी 2015 को आईएमपी कंपनी के जीजीएम सेल्स सर्विस पांडुरंग यादव को पत्र भेजकर 40, 80 और 160 एमवीए के ट्रांसफार्मरों में आ रही कमियों को दुरूस्त करने के निर्देश दिए। सहायक अभियंता उपेंकेंद्र चुड़ियाला हरिद्वार राके कुमार ने भी 22 मार्च 2017 को चौंकाने वाला खुलासा किया है कि 40 एमवीए के ट्रांसफार्मर पर महज 12 से 15 एमवीए का लोडा डाने पर भी वह ट्रांसफार्मर का तापमान 58 से 63 डिग्री के बीच चल रहा है, जबकि कूलिंग फैन भी लगातर चल रहे हैं। ऐसे में आगे गर्मी में 40 एमवीए के ट्रांसफार्मर पर पूरा 40 एमवीए का लोड डालने पर स्थिति क्या होगी इसे समझा जा सकता है।

हाल ही में 7 अप्रैल 2017 को अधीक्षण अभियंता परीक्षण एवं अनुरक्षण रूड़की ने मुख्य अभियंता सी एंड पी को पत्र लिखकर कहा है कि उप केंद्र चुड़ियाला में लगे 40 एमवीए के ट्रांसफार्मर का तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा बना हुआ है। कंपनी के द्वारा निरीक्षण के बावजूद इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।  अनुपम सिंह ने मुख्य अभियंता से कंपनी के द्वारा विभ्ज्ञाग में जमा परफोरमेंस बैंक गारंटी को कैश करा लिया जाए और कंपनी के सभी भुगतान रोक दिए जाए जब तक कि ट्रांसफार्मर की मेनुफेक्चिरिंग डिफेक्ट ठीक नहीं किए जाते। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे में यिद परिवर्तक क्षतिग्रस्त होता है तो इसके लिए फील्ड अधिकारी जिम्मेदार नहीं होंगे।

मजेदार बात यह है कि इस सबके बावजूद निगम प्रबंधन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहा और कार्रवाई के नाम पर बचता रहा। उल्टे कंपनी ने निगम अधिकारियों को धमकाया। पैनाल्टी के बजाय कंपनी उल्टे खराब ट्रांसफार्मरों के एवज में निगम से पैसा वसूलने की बात करता रहा। फिर भी निगम प्रबंधन की आंख नहीं खुली। जिसका नजीता यह है कि निगम के पास कंपनी की करीब साढ़े 5 करोड़ की बैंक गारंटी को भी गुपचुप तरीके से लौटा दिया। अब निगम के पास कंपनी का कुछ भी गिरवी नहीं है। ट्रांसफार्मर ठीक करने के बार-बार के अग्रह के बाद भी कंपनी बेसुध है और पिटकुल प्रबंधन के पास पत्र लिखने के अलावा कोई चारा नहीं है।

आईएमपी के ट्रांसफार्मरों में ये हैं मुख्य कमियां

  • IIV और IV की बुशिंग सीटी रेसो क्रमश: 300/1 व 700/1 है, जबकि फुल लोड करंट के लिए क्रमश: 420 ए और 700 ए है। इसलिए इनके रेसा 500/1 और 800/1 होना चाहिए।
  • V टेरसरी की सीटी में दो कोर होने चाहिए
  • V. A डेल्टा कनेक्टेड हैं, जबकि आरईएफ के स्थान पर डिफ्रेंशियल प्रोटेक्शन होना चाहिए।
  • कवर, टैंक तथा मेन टैंक व वेल जिस स्ट्रिप से जुड़े हैं वह 25×0.8 एमएम के स्थान पर 25×8 एमएम के साथ ही चार के बजाय कम से कम 8 जगह से जुड़ी होनी चाहिए।
  • जो उपकरण सिनटेंस, एबीबी, इक्विवमेंट के या एंकर, इक्विवमेंट लगाने हैं उसमें से इक्विवमेंट शब्द नहीं होना चाहिए।
  • टर्मिनल ब्लाकरा स्टुड टाइप विद स्प्रिंग और फ्लेट वेंदर के होने चाहिए।
  • ट्रांसफार्मरों में ओएलटीसी की स्थिति स्पष्ट नहीं है फिर भी वह ऐसी होनी चाहिए कि वहां तक सुगमतापूर्वक पहुंचा जा सके।
  • ट्रांसफार्मर का अधिकतम तापमान एम्बिएंट किसी भी सूरत में 45 डिग्री से अधिक नहीं बढ़ना चाहिए। इससे ऊपर आग लगने का खतरा है।
  • आईएमपी के ट्रांसफार्मरों में ऋषिकेश में लगे बीएचईएल के ट्रांसफार्मरों से 16 हजार लीटर तेल व 17 हजार किलोग्राम विडिंग व कोर कम है, जो सीजीएल ट्रांसफार्मरों से 43 हजार लीटर व 17 हजार किलोग्राम कम है। इस बात की गहन जांच आवश्यक है कि इन्होंने डिजाइन म्यूटिरियल या मापदंडों में क्या परिवर्तन किए हैं, जो इनसे अधिक सक्षम निर्माता रेपुटेड मैन्युफैक्चर भी नहीं कर पाए।
  • ट्रांसफार्मरों में ऑनलाइन सिस्टम का कहीं कोई विवरण नहीं है।
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आईएमपी के 80 एमवीए के ट्रांसफार्मर में गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर आईआईटी रूड़की से जांच के आदेश दिए गए हैं। आईएमपी के 40 और 160 एमवीए के ट्रांसफार्मरों में खराबी की शिकायतें संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो इनकी भी जांच कराई जाएगी। अनियमितता की भी जांच की जाएगी। कंपनी के साथ मिलीभगत करने वाले अधिकारी भी बख्शे नहीं जाएंगे।

एसएन वर्मा, प्रबंध निदेशक, पिटकुल

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