अमेरिका ने अफगानिस्तान में गिराया 10 हजार किलो का बम

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गुरुवार देर रात अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर पर आईएस के ठिकाने पर दागे गये ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ से हमला किया गया. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, अमेरिका के इस हमले में लगभग 36 आईएस आतंकी मारे गये हैं.

सबसे बड़ा प्रहार

देर रात अमेरिका ने पूर्वी अफगानिस्तान के नंगरहार में अपना सबसे बड़ा नॉन-न्यूक्लियर बम ‘GBU-43’ गिराया है. करीब 21,000 पाउंड यानी 10 हजार किलो वजनी इस बम को वहां ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ के नाम से जाना जाता है. ये अमेरिका का सबसे बड़ा बम है. अमेरिका ने आईएसआईएस पर ये हमला अफगानिस्तान में पाकिस्तान बॉर्डर से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नंगरहार में आईएक के ठिकाने को निशाना बनाकर किया है.

IS के ठिकाने को बनाया निशाना

अमेरिकी सेना के मुताबिक, स्थानीय समय के अनुसार शाम 7.32 बजे गिराए इस सबसे बड़े गैर परमाणु बम के जरिये उन गुफाओं को निशाना बनाया गया, जहां इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने पनाह ले रखी थी.

क्या बोले ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अफगानिस्तान में बम गिराये जाने की अनुमति दी थी, उन्होंने इस मिशन को सफल बताया. व्हाइट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह वास्तव में एक सफल अभियान बताया. हमें अपनी सेना पर गर्व है. उन्होंने कहा कि इससे उत्तर कोरिया को संदेश मिलता है या नहीं, यह उन्हें नहीं पता.

कब किया हमला?

अमेरिका ने पूर्वी अफगानिस्तान के नंगारहर में अपने सबसे बड़ा गैर परमाणु बम ‘GBU-43’ गिराया है. करीब 21,000 पाउंड (9,797 किलो) वजनी इस बम को वहां ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब’ के नाम से जाना जाता है. अमेरिकी सेना के मुताबिक, स्थानीय समय के अनुसार शाम 7.32 बजे गिराए इस सबसे बड़े गैर परमाणु बम के जरिये उन गुफाओं को निशाना बनाया गया, जहां इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने पनाह ले रखी थी.

करजई ने की आलोचना

अमेरिका की ओर से आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) को निशाना बनाकर गिराए गए गैर परमाणु बम ‘GBU-43’ की अफगानिस्तान ने कड़ी आलोचना की है. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने कहा, “मैं अमेरिकी सेना की ओर से घातक गैर परमाणु बम गिराए जाने की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं.” उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ नहीं, बल्कि अफगानिस्तानियों के खिलाफ और अमानवीय है.

2003 में किया था इस बम का परीक्षण

मार्च 2003 में इराक युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका ने जीपीएस से संचालित इस बम का परीक्षण किया था. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता सॉन स्पाइसर ने कहा, ‘हमने आईएसआईएस लड़ाकों द्वारा इस्तेमाल की जा रही गुफाओं और सुरंगों को निशाना बनाया… आम नागरिकों को कम से कम नुकसान हो, यह सुनिश्चित करने के लिए इस हमले से पहले हमने सभी सुरक्षात्मक उपाय किए थे.’

अमेरिकी सैन्य मुख्यालय पेंटागन के प्रवक्ता एडम स्टंप ने कहा, ‘आतंकियों के खिलाफ लड़ाई में पहली बार इस तरह के बम का इस्तेमाल किया गया.’ उन्होंने बताया कि अमेरिकी फायटर जेट MC-130 के जरिये नंगरहार में आंतकियों की गुफाओं पर यह बम गिराया गया. हालांकि अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इस हमले से कितना नुकसान हुआ है.

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