खंडहर हुई उत्तराखंड के वीर गब्बर सिंह की धरोहर

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गांव के साथ – साथ उत्तराखंड के नायकों के घर भी खंडहर होते जा रहे हैं लेकिन सरकार है कि कोरी घोषणाओं के अलावा इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

प्रथम विश्वयुद्ध के नायक वीर गबर सिंह नेगी की बहादुरी का अंग्रेजी हुकूमत ने भी पूरा सम्मान किया। अंग्रेजों ने मरणोपरांत गबर सिंह को ब्रिटिश सरकार के सबसे बड़े सम्मान विक्टोरिया क्रॉस से नवाजा, लेकिन विडंबना देखिए कि सरकार अब तक टिहरी जिले के मंज्यूड़ गांव में स्थित पैतृक घर को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में नहीं संजो पाई।

अब स्थिति यह है रखरखाव के अभाव में शहीद गबर सिंह का घर मटियामेट होने के कगार पर है, लेकिन उसे संभालने वाला कोई नहीं।

चंबा नगर के नजदीकी मंज्यूड़ गांव निवासी विक्टोरिया क्रॉस गबर सिंह की शहादत को सरकार व जनप्रतिनिधि भूलते जा रहे हैं। गबर सिंह की शहादत को 102 साल हो गए हैं, लेकिन उनके पैतृक घर को आज तक ऐतिहासिक धरोहर का दर्जा नहीं मिल पाया, जबकि वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शहीद के मकान को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संजोने की घोषणा की थी।

तब उन्होंने यह भी कहा था कि शहीद के पैतृक घर को संग्रहालय में तब्दील कर वहां गबर सिंह से संबंधित दस्तावेज व चिह्न रखे जाएंगे। ताकि भविष्य की पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से परिचित हो सके। लेकिन, यह घोषणा हकीकत का जामा नहीं ओढ़ पाई।

जानिए कौन थे गबर सिंह नेगी

विक्टोरिया क्रॉस गबर सिंह नेगी का जन्म 21 अप्रैल 1895 को टिहरी जिले में चंबा के पास मंज्यूड़ गांव के एक गरीब परिवार में हुआ था। अक्टूबर 1913 में वे गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए। कुछ समय बाद प्रथम विश्वयुद्ध शुरू हो गया और उन्हें गढ़वाली फौज के साथ फ्रांस भेज दिया गया। वहां वर्ष 1915 में न्यू शैपल में लड़ते हुए मात्र 20 साल की उम्र में वे शहीद हो गए।

पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष इंद्र सिंह नेगी का कहना है कि गबर सिंह की शहादत को एक सदी गुजर गई, लेकिन उनके नाम से गांव में कुछ नहीं बना। यहां तक कि उनके पैतृक मकान का भी संरक्षण नहीं किया जा रहा। नेता आते हैं और घोषणा कर चले जाते हैं।

ग्राम पंचायत मंज्यूड़ के प्रधान महावीर सिंह नेगी का कहना है कि प्रथम विश्वयुद्ध के नायक वीसी गबर सिंह की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण है। कोरी घोषणाएं कर शहीदों का अपमान किया जा रहा है। शहीदों को सम्मान देकर सरकार को प्राथमिकता के आधार पर कार्य करना चाहिए।

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