21 मई से पर्यटकों के लिए खुलेगा द्रोणागिरी ट्रैक

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उत्तराखण्ड में पर्यटन को बढावा देने के लिए एक नयी पहल की जा रही है। 21  मई को उत्तराखण्ड के जोशीमठ से द्रोणागिरी ट्रैक का शुभारंभ किया जायेगा, जिसमे भारत की सभी ट्रैकरों को आमंत्रित किया जायेगा।

इस ट्रेकिंग का मुख्य उददेश्य पहाड़ों में पर्यटन को बढावा देकर स्थानीय लोगो को रोजगार से जोड़ना है। साथ ही पहली बार द्रोणागिरी ट्रैक को उत्तराखण्ड के टुरिज्म मैप में जोड़ा गया है। वहीं द्रोणागिरी ट्रैक तक पहुंचने के लिए हवाई सेवा भी शुरू की जायेगी।

गौरतलब है कि मान्यताओं के अनुसार द्रोणागिरी वही स्थान है जहां से हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा की थी। संजीवनी बूटी के लिए हनुमाम जी पूरा का पूरा पहाड़ उठाकर ले गए थे, जिससे नाराज द्रोणागिरीवासी आज तक हनुमान जी की पूजा नहीं करते हैं। यहां तक की रामलीला में हनुमान के सारे दर्शय काट दिए जाते हैं। यहां हनुमान जी की पूजा तो दूर नाम तक नहीं लिया जाता है।

द्रोणागिरी उत्तराखंड प्रदेश के चमोली जिले में भी है और अल्मोड़ा जिले में भी। लेकिन यहां हम बात चमोली जिले की कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय राजमार्ग (ऋषिकेश-बदरीनाथ) के जोशीमठ से मलारी वाले रास्ते पर पड़ता है.

कैसे पहुंचे द्रोणागिरी

द्रोणागिरी गॉव तक पहुँचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग छोड़कर जोशीमठ से मलारी का अंतर-
जनपदीय सड़क मार्ग पकड़ना पड़ता है जिसमें जोशीमठ से जुम्मा तक लगभग 45 किमी. का सफ़र करने के बाद हमें लगभग 10 किमी. पैदल ट्रेक करके द्रोणागिरी गॉव पहुंचना होता है।

जिसके लिए यह जरुरी है कि आप हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, पौड़ी, श्रीनगर, या अल्मोड़ा से सुबह यात्रा कर रात्री विश्राम जोशीमठ करें व वहां से सुबह सबेरे मलारी जुम्मा के लिए निकल पड़ें. मलारी सडक मार्ग के पास का भोटिया जनजाति का लगभग 300 परिवारों का गॉव है जिसमें लगभग 1000 परिवार निवास करते हैं.

द्रोणागिरी गॉव तक पहुँचने के लिए भले ही आपको मात्र 10 किमी. का पैदल सफ़र करना पड़ता है लेकिन दम फुला देने वाली इस चढ़ाई में आपको कहीं कहीं ऑक्सिजन की कमी भी महसूस होती है. लगभग 3610 मी. (11,855 फिट) की उंचाई में बसा यह गॉव कभी वृहद् आबादी का हुआ करता था लेकिन अब यहाँ मात्र 30-35 परिवार ही दिखने को मिलते हैं।

यहाँ लगभग 15000 फिट की उंचाई पर यहाँ हिमालयी भूभाग में देवदार का घना जंगल है और वहां आपको पक्षियों की चहचाहट सुनाई देगी जो वास्तव में अचम्भित करने वाली बात है क्योंकि इतनी उंचाई पर पक्षियों का होना अपने आप में बेहद आश्चर्यजनक है.

यहां के ग्लेशियरों से धौली गंगा का उद्गम है, यहीं बागिनी ग्लेशियर, गिर्थी ग्लेशियर, चंगबांग ग्लेशियर, नीति ग्लेशियर इत्यादि निकलते है. द्रोणागिरी पर्वत पार तिब्बत है अत: इस गॉव को भारत का अंतिम गॉव भी इस छोर से कहा जाता है।

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