सीरिया की इस जेल में गर्दन तोड़कर 13,000 लोगों को दी गयी दर्दनाक मौत

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सीरियाई राष्‍ट्रपति बशर अल-असद के करीब 13,000 विरोधियों को जेल में गुपचुप रूप से फांसी पर लटका दिया गया है। एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। उसकी यह रिपोर्ट सुरक्षा कर्मियों, बंदियों और जजों सहित 84 प्रत्यक्षदर्शियों के इंटरव्यू पर आधारित है। एम्नेस्टी ने पहले दावा किया था कि मार्च 2011 के बाद से 17,700 लोग सरकारी हिरासत में मारे गए हैं।

एम्नेस्टी इंटरनेशनल की इस 48 पेज की रिपोर्ट का शीर्षक है, ‘ह्यूमन स्लॉटर हाउस : मास हैंगिंग एंड एक्सटर्मिनेशन एट सैदनाया प्रिजन।‘ इसके मुताबिक 2011 और 2015 के बीच दमिश्‍क के पास सैदनाया मिलिटरी जेल में हर हफ्ते 50 लोगों को सामूहिक फांसी दी गई। यह सिलसिला पांच साल से जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कैदियों को न वकील मुहैया करवाया जाता है न ही उनकी दलील सुनी जाती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान कैदियों की आंखें बंद रखी जाती हैं। ज्यादातर को यह नहीं मालूम होता कि उनके साथ कब क्या होने वाला है। इनमें से ज्यादातर वे लोग थे जो राष्ट्रपति बशर अल-असद के विरोधी माने जाते थे। सुरक्षाकर्मी कैदियों से दुष्कर्म करते थे और उन्हें एक-दूसरे से दुष्कर्म करने को मजबूर किया जाता था।

रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार और बुधवार को कैदियों को फांसी देने के लिए चुना जाता था। उन्हें दूसरी जेल भेजा जाता था। जहां तहखाने में उन्हें पीट पीटकर अधमरा किया जाता था। उसके बाद उन्हें फांसी के तख्ते पर लटकाया जाता था। बाद में बिना घरवालों को बताए गुपचुप तरीके से दफना दिया जाता था।

एक पूर्व जज के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं और कम वजन वाले लोगों को बेहद दर्दनाक मौत मिलती थी। फांसी के फंदे पर लटकने से जिनकी मौत नहीं होती थी उन्हें नीचे उतार कर बेदर्दी से उनकी गर्दन मरोड़ दी जाती थी।

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