भाजपा में बगावती सुर मुखर

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  • दो दर्जन सीटों पर बागी होकर पार्टी के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं असंतुष्ट

  • टिकट को लेकर उपजे असंतोष को नहीं रोका तो हो सकता है बड़ा नुकसान

 देहरादून : भाजपा में प्रत्याशियों की घोषणा होते ही पार्टी में असंतुष्ट नेताओं ने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। टिकट न मिलने से कई नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने ऐलान कर रहे हैं। कल जारी की गई 64 सीटों की सूची में 25 सीटों पार्टी के खिलाफ विरोध शुरू हो गया है। कई भाजपा नेताओं ने आज पार्टी मुख्यालय पहुंच कर गलत तरीके से टिकट बांटने का आरोप लगाते हुए विरोध दर्ज किया। जिन्हें बाद में पार्टी नेताओं ने उनकी बातों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखने का भरोसा दिलाया। लेकिन यह तय है कि जिस तरह टिकट वितरण में पार्टी पर सवाल उठाए जा रहे हैं उससे कहीं न कहीं भाजपा को नुकसान उठाना पड़ेगा। समय रहते बागियों को पार्टी ने कंट्रोल नहीं किया, जो संभावनाएं जताई जा रही है चुनाव परिणाम उसके विपरीत भी आ सकते हैं।

चुनाव आते-आते कांग्रेस जरदस्त तरीके से टूट गई। पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भाजपा का दामन थाम तो लिया यहां उनकी राह इतनी आसान नहीं है। जिस तरह पार्टी में टिकट न मिलने से गुस्साए नेता बागी होकर चुनावी ताल ठोंक रहे हैं उससे पार्टी की समस्या बढ़ सकती है। भाजपा ने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी करते ही टिकट की दौड़ में रह गए नेताओं ने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कुछ ने निर्दलीय तो कुछ ने दूसरी पार्टियों के टिकट पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। कई नेताओं के कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव लड़ने की चर्चाएं हैं।

नरेंद्रनगर से बगावत करके पूर्व भाजपा विधायक ओम गोपाल सिंह रावत ने पहले ही निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। प्रतापनगर सीट से भी राजेश्वर प्रसाद पैन्यूली भी इंडियन बिजनेस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। कोटद्वार से शैलेंद्र सिंह रावत, रूड़की से सुरेश जैन, गंगोत्री सूरत राम नौटियाल, केदारनाथ से आशा नौटियाल, कर्णप्रयाग से अनिल नौटियाल, यमुनोत्री से मनवीर चौहान, रणवीर राणा, जगवीर भंडारी, देवप्रयाग से दिवाकर भट्ट, धनोल्टी से महावीर रांगड़ और घनसाली से धनी लाल शाह समेत करीब 25 सीटों पर भाजपा को अपनों की बगावत से जूझना पड़ेगा। यह अलग बात है कि नर्दलीय होकर सभी बागी नहीं जीते सकें, लेकिन वह पार्टी प्रत्याशियों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं, जिसका ओवर ऑल भाजपा को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसलिए टिकट वितरण की बाद सुलगी बगावत की आग को पार्टी नहीं बुझाएगी तो इसके परिणाम उलट भी को सकते हैं।

 

वापस जाओ खजान दास के गूंजे नारे

सोमवार को प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद मंगलवार को कई असंतुष्ट नेता समर्थकों के साथ भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पहुंचे। जहां उन्होंने विरोध जताकर टिकट वितरण में धांधली का आरोप लगाया। राजपुर सीट पर पूर्व मंत्री खजान दास को टिकट दिए जाने पर रविंद्र कटारिया के समर्थन में पार्टी कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पहुंचे, जहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए खजान दास वापस जाओ के नारे लगाए। कटारिया ने टिकट न मिलने पर राजपुर सीट हारने की चेतावनी दी। बाद में पार्टी नेताओं के समझाने और उनकी बात को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने की बात पर कार्यकर्ता किसी तरह शांत हुए। इस दौरान वहां पर चुनाव समिति के संयोजक ज्योति प्रसाद गैरोला, प्रदेश प्रवक्ता विनय गोयल, प्रदेश मीडिया प्रभारी डा.देवेंद्र भसीन और प्रदेश महामंत्री नरेश बंसल आदि मौजूद रहे।

 

इन सीटों पर बगावत के आसार

गंगोत्री, यमुनोत्री, धनोल्टी, देवप्रयाग, प्रतापनगर, नरेंद्रनगर, केदारनाथ, चौबट्टाखाल, थराली, र्काप्रयाग, कोटद्वार और रूड़की।

 

 

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