राकेश शर्मा को भाजपा की ‘ना’

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अब कैसे पूरी होगी राकेश शर्मा की नेता बनने की हसरत ?

देहरादून : प्रदेश के चर्चित नौकरशाह रहे राकेश शर्मा को बड़ा झटका लगा है। नेता बनने की हरसत पाले शर्मा को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से ‘ना’ हो गई है। खबर है कि भाजपा ने शर्मा को विधानसभा चुनाव का टिकट देने से इंकार कर दिया है। किच्छा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे शर्मा लंबे वक्त से भाजपा से टिकट पाने के लिए लाबिंग में जुटे थे। बताया जाता है कि इसके लिए उन्होंने बीजेपी के प्रदेश स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक एप्रोच लगाई हुई थी। अब भाजपा के इंकार के बाद शर्मा के पास दो ही विकल्प रह गए हैं। पहला कांग्रेस और दूसरा निर्दलीय।
पहले विकल्प की बात करें तो इस बात की बेहद कम संभावना है कि शर्मा को कांग्रेस पार्टी टिकट देगी। इसकी वजह बीते साल 18 मार्च के बाद का घटनाक्रम है। दरअसल शर्मा तब प्रदेश के प्रधान मख्य सचिव पद पर विराजमान थे, और मुख्यमंत्री हरीश रावत के विश्वासपात्र समझे जाते थे। लेकिन 18 मार्च को विधानसभा में हुई बगावत के बाद जब राज्यपाल ने हरीश रावत को बहुमत साबित करने को कहा तो शर्मा को लेकर यह बात सुनी गई कि वे हरीश रावत के बजाय विरोधी खेमे के लिए लाबिंग कर रहे थे। उसके बाद जब हरीश रावत दुबारा मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने शर्मा को खुद से दूर कर लिया। तब से आज तक दोनों की राहें जुदा हैं। ऐसे में जाहिर है कि शर्मा के लिए कांग्रेस का टिकट पाना टेढी खीर होगा। लिहाजा उनके पास एक मात्र रास्ता यही बचता है कि वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरें। हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि राष्ट्रीय पार्टियों से टिकट न मिलने की स्थिति में शर्मा शायद चुनाव न लड़ें। लेकिन सियासी पारी खेलने को आतुर राकेश शर्मा अब इतने आगे बढ चुके हैं, कि पीछे हटने का विकल्प उन्होंने खुद ही खत्म कर दिया है। विधानसभा के अंदर पहुंचने की हसरत उनके अंदर इस कदर हिलोरें मार रही हैं कि उन्होंने बहुत पहले से ही किच्छा विधानसभा क्षेत्र के अधीन आने वाले तमाम कस्बों को पोस्टर-बैनरों से पाट दिया है। किसी पोस्टर में उन्हें प्रदेश का ‘मुख्य प्रधान सेवक’ बताया गया है तो किसी बैनर में वे त्यौहारों की बधाई और शुभकामनाएं दे रहे हैं। इसके साथ ही वे दिल्ली से लेकर देहरादून और रुद्रपुर तक तमाम ‘बड़े’ पत्रकारों से अपनी संभावनाओं के बारे में ‘फीड’ ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि देहरादून में वे अब तक दो बार पत्रकारों को दावत दे चुके हैं। दोनों दावतों में चंद ‘खास’ पत्रकारों को ही बुलाया गया।

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